राजा भैया की पत्नी की शिकायत पर MLC अक्षय प्रताप सिंह को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को एमएलसी (MLC) अक्षय प्रताप सिंह और तीन अन्य की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी। यह पूरा मामला पूर्व कैबिनेट मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत से जुड़ा है।

न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने लखनऊ की विशेष अदालत (MP-MLA कोर्ट) के फैसले को बरकरार रखते हुए कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने प्रेक्षण में कहा कि विशेष अदालत के उस आदेश को रद्द करने का कोई ठोस आधार नहीं है, जिसमें मामले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया गया था।

विवाद की जड़ में भानवी सिंह की कंपनी ‘मेसर्स सारंग एंटरप्राइजेस’ से जुड़ी संपत्तियां हैं। शिकायत के अनुसार, अक्षय प्रताप सिंह ने रोहित कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह और रामदेव यादव के साथ मिलकर कथित तौर पर कंपनी की कीमती संपत्तियों को हड़पने की साजिश रची।

भानवी सिंह का आरोप है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए और हेरफेर के जरिए कंपनी की संपत्तियों को अवैध रूप से कहीं और ट्रांसफर कर दिया। इस मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए उन्होंने न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत का दरवाजा खटखटाया था और लखनऊ की हजरतगंज पुलिस को एफआईआर (FIR) दर्ज कर जांच शुरू करने का निर्देश देने की अपील की थी।

इस मामले में निचली अदालतों में अब तक कई मोड़ आ चुके हैं:

  • 19 अक्टूबर, 2023: न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने भानवी सिंह के आवेदन को एफआईआर के बजाय ‘शिकायत मामले’ (Complaint Case) के रूप में दर्ज करने का फैसला किया था।
  • निगरानी याचिका (Revision Plea): इस फैसले से असंतुष्ट होकर भानवी सिंह ने विशेष अदालत में निगरानी याचिका दायर की।
  • 18 फरवरी, 2024: विशेष एमपी-एलएलए अदालत ने मजिस्ट्रेट के अक्टूबर के आदेश को रद्द कर दिया और मामले पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया।
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अक्षय प्रताप सिंह और उनके साथियों ने विशेष अदालत के इसी 18 फरवरी के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन उन्हें वहां से कोई राहत नहीं मिली।

याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने आरोपियों पर लगे आरोपों की गंभीरता को रेखांकित किया। हाईकोर्ट के इस रुख के बाद अब विशेष अदालत का पुनर्विचार वाला आदेश प्रभावी रहेगा, जिससे जालसाजी और संपत्ति की हेराफेरी के इन आरोपों की गहन जांच का रास्ता साफ हो गया है।

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