वयस्क को अपनी पसंद से साथी चुनने का मौलिक अधिकार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिता की हिरासत से छुड़ाकर युवती को पति के साथ भेजा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि बालिग व्यक्ति को अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने और अपनी इच्छा के अनुसार जिंदगी जीने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह व्यक्तिगत फैसला है और इसे माता-पिता या परिवार के सदस्यों की इच्छा से तय या नियंत्रित नहीं किया जा सकता। जस्टिस संदीप जैन की पीठ ने गाजियाबाद की 26 वर्षीय सोनिका चौहान को पिता के नियंत्रण से तत्काल मुक्त करते हुए उनके पति अकबर खान के साथ जाने की इजाजत दे दी। इसके साथ ही अदालत ने स्थानीय पुलिस को दंपती की सुरक्षा सुनिश्चित करने और परिजनों को उनके वैवाहिक जीवन में किसी भी प्रकार का दखल न देने का निर्देश दिया।

यह आदेश जस्टिस संदीप जैन ने एक हैबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को पारित किया। इससे पहले अदालत ने 8 सितंबर 2026 को इस मामले में आदेश जारी किया था, जिसके अनुपालन में प्रशासन ने सोनिका को मंगलवार को पीठ के समक्ष पेश किया।

अदालत के समक्ष युवती और पति के बयान

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पीठ ने अदालत कक्ष में सोनिका चौहान से सीधे बातचीत की। सोनिका ने दो टूक शब्दों में बताया कि वह 26 वर्ष की स्नातक युवती हैं और उन्होंने पूरी तरह अपनी मर्जी से अकबर खान से शादी की है। सोनिका ने अदालत को बताया कि वह अपने पति के साथ ही रहना चाहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता इस विवाह के खिलाफ थे, जिसके चलते उन्होंने उन्हें घर के भीतर जबरन बंधक बनाकर रखा हुआ था।

सोनिका के पति अकबर खान ने भी अदालत के समक्ष इन बयानों की पुष्टि की और सोनिका के साथ दांपत्य जीवन बिताने की अपनी रजामंदी दर्ज कराई।

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पिता ने लगाया ब्लैकमेल और दबाव का आरोप

दूसरी ओर, सोनिका के पिता लक्ष्मण सिंह चौहान ने याचिका का विरोध किया। अदालत से बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि अकबर उनकी बेटी को ब्लैकमेल कर रहा है और सोनिका उसके दबाव में है। पिता ने दावा किया कि उनकी बेटी बिना किसी दबाव के अपनी इच्छा से उनके घर में रह रही थी।

व्यक्तिगत पसंद पर परिवार की मर्जी मान्य नहीं

दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पिता की दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने रेखांकित किया कि यह कानूनन स्थापित सिद्धांत है कि वयस्कता की उम्र प्राप्त कर चुका व्यक्ति अपनी पसंद का साथी चुनने और अपनी शर्तों पर जीवन जीने का पूर्ण अधिकार रखता है। अदालत के अनुसार, ऐसा चयन व्यक्ति का निजी मामला है और इसे परिवार या माता-पिता की इच्छाओं के अधीन नहीं किया जा सकता।

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अदालत ने आदेश दिया कि सोनिका अपने पति अकबर खान के साथ रहने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। इसके साथ ही पीठ ने पुलिस अधिकारियों को दोनों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया और परिवार के सदस्यों को उनके वैवाहिक जीवन में किसी भी तरह का व्यवधान न डालने की सख्त हिदायत दी।

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