सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली न्यायिक सेवा के अधिकारी अमन शर्मा की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच से जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। अमन शर्मा 2 मई को दक्षिण दिल्ली स्थित अपने आवास पर मृत पाए गए थे।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए मामले की जांच में अब तक हुई प्रगति की जानकारी मांगी।
सुप्रीम कोर्ट ने 30 अक्टूबर को अमन शर्मा की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लिया था। इस मामले का शीर्षक इन री: द सस्पिशियस डेथ ऑफ ज्यूडिशियल ऑफिसर (एक्स-जज) अमन शर्मा है।
अमन शर्मा की मौत के बाद उनके परिवार ने आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी, जो स्वयं न्यायिक अधिकारी हैं, और ससुराल पक्ष के लोग उन्हें लंबे समय से मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। आरोप है कि इसी प्रताड़ना के बीच उन्होंने आत्महत्या कर ली।
पिता की शिकायत पर पत्नी के खिलाफ FIR दर्ज
अमन शर्मा के पिता की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने उनकी पत्नी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61 (आपराधिक साजिश) और धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत FIR दर्ज की थी।
परिवार का आरोप है कि अमन शर्मा लगातार मानसिक उत्पीड़न का सामना कर रहे थे और मौत से पहले करीब दो महीने से अत्यधिक दबाव में थे।
बाद में मामले की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। अब सुप्रीम कोर्ट ने इसी जांच की प्रगति का विवरण मांगा है।
2021 में दिल्ली न्यायिक सेवा में शामिल हुए थे अमन शर्मा
अमन शर्मा ने वर्ष 2018 में कानून की पढ़ाई पूरी की थी और 2021 में दिल्ली न्यायिक सेवा में शामिल हुए थे।
मौत के समय वह कड़कड़डूमा कोर्ट स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) में सचिव के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने अक्टूबर 2025 में यह पद संभाला था।
सुप्रीम कोर्ट ने अब स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई कार्यवाही के तहत दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच से जांच की वर्तमान स्थिति अदालत के सामने रखने को कहा है।
