इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। मामला वर्ष 2024 में अमेरिका दौरे के दौरान सिख समुदाय की सुरक्षा को लेकर उनके कथित बयान से जुड़ा है।
जस्टिस विक्रम डी. चौहान ने वाराणसी की दो अदालतों के आदेशों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इन अदालतों ने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग पहले ही खारिज कर दी थी।
हाईकोर्ट ने पाया कि राहुल गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोप केवल अखबारों में प्रकाशित खबरों पर आधारित थे। याचिकाकर्ता यह स्पष्ट नहीं कर सका कि कथित बयान किस तारीख, समय और स्थान पर दिया गया था।
अदालत ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश नहीं दिया जा सकता।
अखबारों की खबरों के आधार पर FIR दर्ज करने की मांग
यह मामला नागेश्वर मिश्रा की शिकायत से शुरू हुआ था। उन्होंने राहुल गांधी के 2024 के अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए कथित बयान को लेकर FIR दर्ज करने की मांग की थी।
शिकायत में अखबारों की उन खबरों का हवाला दिया गया था, जिनमें राहुल गांधी के कथित बयान के अनुसार भारत में सिख समुदाय के लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे थे।
मिश्रा ने इस आधार पर वाराणसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आवेदन दाखिल किया था। हालांकि, अदालत ने 17 अक्टूबर 2025 को उनका आवेदन खारिज कर दिया।
इसके बाद उन्होंने सेशन कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की, जिसे 9 जुलाई को खारिज कर दिया गया।
दोनों आदेशों को चुनौती देते हुए मिश्रा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट ने आरोपों में ठोस विवरण का अभाव पाया
याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम डी. चौहान ने कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ एकमात्र आरोप उनके अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए कथित बयान से संबंधित अखबारों की खबरों पर आधारित है।
अदालत ने पाया कि शिकायत में कथित बयान की तारीख, समय और स्थान का कोई विवरण नहीं दिया गया था।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन परिस्थितियों में किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।
इसी आधार पर अदालत ने याचिका खारिज कर दी और राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने से इनकार करने वाले वाराणसी की अदालतों के आदेशों में हस्तक्षेप नहीं किया।
