केरल हाईकोर्ट ने श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय के 16 निलंबित छात्रों को सेमेस्टर परीक्षा में बैठने की अनुमति देने वाला एकल न्यायाधीश का आदेश रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय और उसकी कुलपति सीजा थॉमस की संयुक्त अपील स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।
न्यायमूर्ति अनिल के. नरेंद्रन और न्यायमूर्ति मुरली कृष्ण एस. की खंडपीठ ने मंगलवार को 30 अक्टूबर के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें एकल न्यायाधीश ने निलंबित छात्रों को 4 नवंबर से शुरू होने वाली परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दी थी। साथ ही विश्वविद्यालय को छात्रों से आवश्यक परीक्षा शुल्क स्वीकार करने का निर्देश दिया गया था।
खंडपीठ के फैसले के विस्तृत कारणों वाला जजमेंट अभी आना बाकी है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी छात्रों का विरोध जारी
हाईकोर्ट के फैसले पर निलंबित छात्रों ने निराशा जताई है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़े इन छात्रों ने सोमवार से विश्वविद्यालय परिसर के बाहर भूख हड़ताल शुरू की थी।
छात्रों ने कहा कि वे अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे और हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ कानूनी कदम भी उठाएंगे।
प्रदर्शनकारी छात्रों में से एक ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।
विश्वविद्यालय की कुलपति सीजा थॉमस का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार करने और उनके साथ कथित मारपीट के मामले में इन 16 छात्रों को दो महीने से अधिक समय से निलंबित रखा गया है।
12 छात्रों का निलंबन माफी मांगने पर वापस लेने का प्रस्ताव
इससे पहले सोमवार को श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, जिसे कालडी विश्वविद्यालय के नाम से भी जाना जाता है, की सिंडिकेट ने 16 में से 12 छात्रों का निलंबन वापस लेने के लिए एक शर्त रखी थी।
सिंडिकेट ने फैसला किया था कि यदि ये 12 छात्र कुलपति से लिखित माफी मांगते हैं, तो उनका निलंबन वापस लिया जा सकता है।
हालांकि, शेष चार छात्रों का निलंबन दो महीने और बढ़ाने का निर्णय लिया गया। सिंडिकेट सदस्यों के अनुसार, ये छात्र निलंबित होने के बावजूद विश्वविद्यालय परिसर में दाखिल हुए थे।
SFI ने सिंडिकेट की इस शर्त को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि उसके छात्र माफी नहीं मांगेंगे।
CPI(M) ने छात्रों के रुख का समर्थन किया
केरल में CPI(M) के प्रदेश सचिव एम.वी. गोविंदन ने भी छात्रों से माफी मांगने की शर्त का विरोध किया।
मंगलवार को तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान गोविंदन ने आरोप लगाया कि वी.डी. सावरकर सहित RSS के कुछ नेताओं ने ब्रिटिश शासन के दौरान सजा से बचने के लिए माफी मांगी थी और स्वतंत्रता संग्राम में भाग नहीं लेने का वादा किया था।
उन्होंने कहा कि केरल में SFI ऐसा रुख नहीं अपनाएगी और छात्रों के हितों के खिलाफ किसी भी फैसले का कड़ा विरोध किया जाएगा।
फिलहाल, हाईकोर्ट के आदेश के बाद निलंबित छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने वाला एकल न्यायाधीश का फैसला प्रभावी नहीं रहा है। छात्रों ने विश्वविद्यालय की अनुशासनात्मक कार्रवाई के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है।
