गंभीर आरोपों के बावजूद प्रथम दृष्टया साक्ष्यों का आकलन जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट ने UAPA मामले में आरोपी की जमानत बरकरार रखी

दिल्ली हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में आतंकी साजिश से जुड़े UAPA मामले में कश्मीरी युवक मतीन अहमद भट को मिली जमानत बरकरार रखी है। कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की अपील खारिज करते हुए कहा कि निचली अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही तरीके से आकलन किया था।

जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस अरुण भारद्वाज की डिवीजन बेंच ने 30 अक्टूबर को दिए फैसले में कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप गंभीर हैं, लेकिन उनकी जांच ट्रायल के दौरान ही हो सकती है। कोर्ट ने यह भी माना कि मुकदमे की सुनवाई जल्द पूरी होने की संभावना नहीं है।

हाईकोर्ट ने 3 मई 2023 को निचली अदालत द्वारा दिए गए जमानत आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए NIA की अपील खारिज कर दी।

आरोप तय होने के बाद भी जमानत आदेश में हस्तक्षेप से इनकार

NIA ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि निचली अदालत ने जमानत देने के बाद वर्ष 2024 में आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए थे। एजेंसी के अनुसार, इससे पहले दिए गए जमानत आदेश में विरोधाभास और त्रुटि सामने आती है।

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हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। बेंच ने कहा कि निचली अदालत ने यह निर्धारित करने के लिए रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री की उचित जांच की थी कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं या नहीं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बाद में आरोप तय किए जाने का आदेश, पहले दिए गए जमानत आदेश के खिलाफ दाखिल अपील पर विचार करने के लिए प्रासंगिक नहीं है।

आतंकी संगठनों से संबंध होने का आरोप

NIA के अनुसार, मतीन अहमद भट ने कश्मीर घाटी में सक्रिय एक आतंकवादी के लिए ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में काम करने की साजिश में स्वेच्छा से भाग लिया था।

एजेंसी ने आरोप लगाया कि भट प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के लिए हथियार और गोला-बारूद जुटाने की गतिविधियों में शामिल था। इन गतिविधियों का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में अशांति फैलाना था।

NIA का यह भी दावा था कि संविधान के अनुच्छेद 370 और 35 को हटाए जाने के बाद प्रतिबंधित आतंकी संगठनों ने स्थानीय युवाओं को अलगाववादी समूहों से जुड़ने और OGW के रूप में काम करने के लिए प्रभावित किया।

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जांच एजेंसी के मुताबिक, भट ने हिजबुल मुजाहिदीन के एक आतंकवादी से मुलाकात की थी और वह उसके अलावा अन्य सक्रिय आतंकवादियों तथा पाकिस्तान में मौजूद हैंडलरों के लिए काम कर रहा था। इनका संबंध लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे प्रतिबंधित संगठनों से बताया गया।

अक्टूबर 2021 में हुई थी गिरफ्तारी

मतीन अहमद भट को 13 अक्टूबर 2021 को गिरफ्तार किया गया था। NIA ने अप्रैल 2022 में उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120B (आपराधिक साजिश) और धारा 121A (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने से संबंधित साजिश) के साथ UAPA की धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।

निचली अदालत ने 3 मई 2023 को भट को जमानत दी थी। इसके बाद वर्ष 2024 में उसके खिलाफ आरोप तय किए गए।

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हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपों की गंभीरता के बावजूद उनकी सत्यता का परीक्षण ट्रायल में किया जाना है। बेंच ने निचली अदालत के जमानत आदेश को बरकरार रखते हुए NIA की अपील खारिज कर दी।

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