सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी अदालत या ट्रिब्यूनल से किया गया उसका अनुरोध केवल अनुरोध नहीं, बल्कि निर्देश माना जाएगा। ऐसे निर्देश का पालन नहीं किए जाने को बेहद गंभीरता से लिया जाएगा।
जस्टिस जे.बी. परदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) से स्पष्टीकरण मांगा है कि सुप्रीम कोर्ट के अनुरोध के बावजूद संबंधित मामले की सुनवाई क्यों नहीं की गई।
बेंच ने विविध आवेदन पर नोटिस जारी करते हुए फिलहाल ऋणदाताओं की समिति (Committee of Creditors – CoC) के गठन पर रोक लगा दी है।
क्या था मामला?
सुप्रीम कोर्ट ने 15 जुलाई 2026 को NCLAT के 17 जून और 29 जून 2026 के आदेशों से संबंधित अपीलों का निपटारा किया था। ये आदेश कंपनी अपील (AT) संख्या 210/2026 में पारित किए गए थे।
अपीलकर्ताओं ने दूसरे प्रतिवादी की कंपनी को मौजूदा सभी शेयरधारकों के लिए अंकित मूल्य पर राइट्स इश्यू के जरिए पूंजी जुटाने की अनुमति देने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने उस समय कहा था कि विवादित तथ्यों से जुड़े प्रश्नों का निर्णय करना उसके लिए कठिन है। इसलिए उसने सभी पक्षकारों को 23 जुलाई 2026 को NCLAT के समक्ष अपनी दलीलें रखने की स्वतंत्रता दी थी।
चूंकि राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) की धारा 7 के तहत आवेदन पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT से विशेष अनुरोध किया था कि मामले की सुनवाई निर्धारित तारीख पर सुनिश्चित की जाए।
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि सुनवाई नहीं हुई
आवेदक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मीनाक्षी अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि NCLAT ने अब तक मामले की सुनवाई नहीं की है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस बीच NCLT ने अपना सुरक्षित आदेश सुना दिया और IBC की धारा 7 के तहत आवेदन स्वीकार कर लिया।
पहले प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता जे. राजेश और चौथे प्रतिवादी बैंक की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार गौतम पेश हुए।
सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के रवैये पर जताई चिंता
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा:
“हम इस मुकदमे में NCLAT के आचरण के तरीके से काफी परेशान हैं।”
बेंच ने स्पष्ट किया कि NCLAT से अनुरोध उसके न्यायिक पद की गरिमा का सम्मान करते हुए किया गया था, ताकि उसकी स्थिति को कमतर न दिखाया जाए।
कोर्ट ने कहा:
“जब सुप्रीम कोर्ट किसी अदालत या ट्रिब्यूनल से अनुरोध करता है, तो उसे निर्देश के रूप में समझा जाना चाहिए, न कि केवल अनुरोध के रूप में।”
बेंच ने आगे कहा:
“यदि सुप्रीम कोर्ट किसी अदालत या ट्रिब्यूनल से कोई अनुरोध करता है, तो उसे निर्देश माना जाएगा और ऐसे निर्देश का पालन नहीं किए जाने को बेहद गंभीरता से लिया जाएगा।”
NCLAT से जवाब तलब, CoC के गठन पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि NCLAT ने अब मामले की सुनवाई 17 नवंबर 2026 के लिए निर्धारित की है।
बेंच ने NCLAT से यह स्पष्ट करने को कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद मामले की सुनवाई क्यों नहीं की गई।
कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए इसे 19 नवंबर 2026 तक जवाब के लिए निर्धारित किया। साथ ही सामान्य प्रक्रिया के अतिरिक्त दस्ती नोटिस तामील कराने की भी अनुमति दी।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस बीच ऋणदाताओं की समिति (CoC) का गठन नहीं किया जाएगा।
केस डिटेल्स
केस का नाम: Sona Bansal v. Vashisht Kumar Goyal & Ors.
केस नंबर: Miscellaneous Application Diary No. 54224/2026
पीठ: जस्टिस जे.बी. परदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन
आदेश की तारीख: 27 अक्टूबर 2026
