केवल आपत्तिजनक पोस्ट शेयर करने से आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े मामले में छात्रा की FIR रद्द की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद इंस्टाग्राम पर विवादित पोस्ट दोबारा शेयर करने के मामले में 20 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्रा के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी है। कोर्ट ने कहा कि किसी पोस्ट से लोगों की भावनाएं आहत होने या नाराजगी पैदा होने की आशंका मात्र आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकती।

जस्टिस मिलिंद जाधव की एकल पीठ ने मंगलवार को यह फैसला सुनाते हुए कहा कि छात्रा ने विवादित सामग्री स्वयं तैयार नहीं की थी। उसने केवल सोशल मीडिया पर पहले से मौजूद पोस्ट को शेयर किया था। इसके अलावा, छात्रा ने दो घंटे के भीतर अपनी मर्जी से पोस्ट हटा दी और सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी।

हाईकोर्ट ने छात्रा की कम उम्र और पहले ही हिरासत में रहने के तथ्य को भी ध्यान में रखा। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में युवा छात्रों को सुधार का अवसर मिलना चाहिए। किसी युवा छात्र के लिए हिरासत में रहने का अनुभव ऐसा दाग छोड़ सकता है, जिसे आसानी से मिटाया नहीं जा सकता।

केवल नाराजगी की आशंका आपराधिक कार्रवाई का आधार नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि विवादित पोस्ट में धर्म और धार्मिक भावनाओं से जुड़ी बातें थीं। ऐसे विषयों पर संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ विचार करना आवश्यक है, विशेष रूप से ऐसे समाज में जहां विभिन्न धार्मिक समुदायों के लोग रहते हैं।

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जस्टिस जाधव ने माना कि संबंधित पोस्ट विवाद पैदा करने वाली थी और उससे लोगों में आक्रोश तथा नफरत की भावना उत्पन्न हो सकती थी। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्रा की भूमिका केवल उस सामग्री को दोबारा शेयर करने तक सीमित थी, जो पहले से सोशल मीडिया पर उपलब्ध थी।

कोर्ट के अनुसार, प्रथम दृष्टया पोस्ट की सामग्री से धार्मिक समुदायों के बीच तनाव उत्पन्न होने की आशंका हो सकती थी। लेकिन केवल इस संभावना के आधार पर कि किसी प्रकाशन से लोगों में असंतोष या नाराजगी पैदा होगी, आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी सामग्री को आपत्तिजनक समझे जाने भर से आपराधिक कानून लागू नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित व्यक्ति का आचरण कानून में निर्धारित किसी निषेध के दायरे में आना आवश्यक है।

बिना पुलिस के निर्देश के हटाई थी पोस्ट

हाईकोर्ट ने छात्रा के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करते समय इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना कि उसने विवादित पोस्ट शेयर करने के दो घंटे के भीतर उसे हटा दिया था।

कोर्ट ने कहा कि पोस्ट हटाने का फैसला छात्रा ने स्वयं लिया था। जांच एजेंसी ने उसे ऐसा करने का कोई निर्देश नहीं दिया था।

छात्रा ने पोस्ट हटाने के साथ ही सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया और अपनी गलती के लिए माफी भी मांगी थी।

जस्टिस जाधव ने कहा कि उपलब्ध परिस्थितियों से यह सामने नहीं आता कि छात्रा ने जानबूझकर धार्मिक समुदायों के बीच शत्रुता बढ़ाने का प्रयास किया था।

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कोर्ट ने यह भी माना कि यह घटना छात्रा की कम उम्र और युवावस्था के उत्साह के कारण हुई एक अलग-थलग घटना प्रतीत होती है।

हाईकोर्ट ने कहा कि छात्रा पहले ही हिरासत में रह चुकी है और ऐसे मामलों में उसे आगे बढ़ने का अवसर दिया जाना चाहिए।

7 मई को शेयर की थी पोस्ट, 9 मई को हुई गिरफ्तारी

मामला पुणे के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा से जुड़ा है।

छात्रा ने 7 मई 2025 को इंस्टाग्राम पर ‘Reformistan’ नामक अकाउंट की एक पोस्ट दोबारा शेयर की थी। इस पोस्ट में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध भड़काने को लेकर भारत सरकार की आलोचना की गई थी।

यह घटना ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के दौरान हुई थी।

पोस्ट शेयर करने के बाद छात्रा को बड़ी संख्या में धमकियां मिलने लगीं। इसके बाद उसने दो घंटे के भीतर पोस्ट हटा दी।

हालांकि, इस मामले में 9 मई 2025 को छात्रा को गिरफ्तार कर लिया गया।

विवादित पोस्ट के कारण कॉलेज ने छात्रा को संस्थान से निष्कासित भी कर दिया था।

कॉलेज से निष्कासन को भी दी थी चुनौती

छात्रा ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने की मांग की थी। इसके साथ ही उसने कॉलेज से निष्कासित किए जाने के फैसले को भी चुनौती दी थी।

छात्रा का तर्क था कि कथित आपत्तिजनक पोस्ट के आधार पर उसे संस्थान से निकालना मनमाना और गैरकानूनी था।

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इस मामले में मई 2025 में हुई पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने छात्रा की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए थे और उसे तत्काल रिहा करने का आदेश दिया था।

अब जस्टिस मिलिंद जाधव की पीठ ने छात्रा की भूमिका, पोस्ट हटाने के उसके स्वैच्छिक फैसले, सार्वजनिक माफी और हिरासत में बिताए समय को ध्यान में रखते हुए उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द कर दिया है।

ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि

अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।

इस सैन्य अभियान के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों से जुड़े नौ स्थानों पर सटीक हवाई हमले किए थे।

इस कार्रवाई को 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के बाद भारत की सबसे साहसिक सीमा पार सैन्य कार्रवाइयों में से एक बताया गया था।

इसी अभियान के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के दौरान छात्रा ने विवादित इंस्टाग्राम पोस्ट शेयर की थी, जिसके कारण उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हुआ था।

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