रेलवे स्टेशनों के आरक्षण काउंटरों से आरक्षित टिकट खरीदने वाले यात्रियों को भी अब वैकल्पिक यात्रा बीमा (ट्रैवल इंश्योरेंस) की सुविधा मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए रेलवे बोर्ड ने शनिवार को सभी जोनल रेलवे को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने सभी रेलवे जोनों को 27 अक्टूबर तक आरक्षण काउंटरों पर यह सेवा अनिवार्य रूप से शुरू करने और यात्रियों को इसकी जानकारी देने को कहा है। अब तक यह सुविधा केवल ऑनलाइन ई-टिकट बुक कराने वाले यात्रियों के लिए ही उपलब्ध थी।
काउंटर से टिकट लेते समय बीमा का विकल्प चुनने वाले यात्रियों से ई-टिकट की तरह ही 45 पैसे प्रति यात्री प्रीमियम लिया जाएगा। हालांकि, रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि काउंटर टिकट पर बीमा का प्रीमियम केवल डिजिटल माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा।
आरक्षण कर्मियों के लिए नई व्यवस्था और दिशा-निर्देश
रेलवे बोर्ड के निर्देशों के मुताबिक, टिकट खिड़की पर तैनात आरक्षण कर्मियों और सुपरवाइजरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बीमा कराने वाले यात्री का मोबाइल नंबर और जरूरी विवरण पूरी सटीकता के साथ दर्ज किए जाएं। मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा ताकि बीमा कंपनी को ब्योरा भेजकर पॉलिसी जारी की जा सके। टिकट बनते ही पॉलिसी से जुड़ी जानकारी यात्री के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेज दी जाएगी।
काउंटर से जारी होने वाले इन बीमा कवर पर भी आईआरसीटीसी की ‘ऑप्शनल ट्रैवल इंश्योरेंस स्कीम’ (ओटीआईएस) के वही नियम व शर्तें लागू होंगी, जो वर्तमान में ऑनलाइन ई-टिकट धारकों पर लागू हैं।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से ऑफलाइन यात्रियों को मिला सुरक्षा कवच
रेलवे का यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा 6 अक्टूबर को दिए गए उस आदेश के बाद आया है, जिसमें रेलवे बोर्ड को ऑफलाइन या काउंटर टिकटों पर भी बीमा सुविधा देने का निर्देश दिया गया था।
देश में भले ही 87 प्रतिशत से अधिक रेल टिकट ऑनलाइन बुक होते हैं, लेकिन दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले और समाज के कमजोर तबके के लोग आज भी यात्रा के लिए काउंटर टिकटों पर ही निर्भर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि अधिकारियों को एक ऐसी कार्यप्रणाली तैयार करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया है, जिससे समाज के सबसे निचले तबके के उन लोगों को भी यह सुरक्षा मिल सके जो ट्रेनों में सफर के लिए रेलवे आरक्षण काउंटरों से टिकट खरीदते हैं।
कानून के तहत रेल हादसों या किसी अप्रिय घटना के दौरान हताहत यात्रियों को रेलवे की ओर से अनिवार्य मुआवजा तो मिलता ही है, लेकिन यह थर्ड-पार्टी यात्रा बीमा यात्रियों को अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है।
बीमा राशि, दायरा और पात्रता की शर्तें
इस बीमा योजना के तहत नुकसान और गंभीरता के आधार पर 2 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक की बीमा राशि का प्रावधान है। यह पॉलिसी रेल दुर्घटनाओं या अप्रिय घटनाओं के दौरान मृत्यु, पूर्ण स्थायी दिव्यांगता, आंशिक स्थायी दिव्यांगता, अस्पताल में इलाज के खर्च और पार्थिव शरीर को ले जाने के खर्च को कवर करती है।
योजना से जुड़े प्रमुख पात्रता नियम इस प्रकार हैं:
यह योजना केवल भारतीय नागरिकों के लिए है और बुकिंग के समय कन्फर्म, आंशिक कन्फर्म या आरएसी टिकट रखने वाले यात्रियों को ही मिलेगी।
5 से 11 वर्ष के बच्चे इस बीमा के दायरे में आएंगे, चाहे उनका टिकट सीट या बर्थ के साथ बुक हुआ हो या बिना बर्थ के।
5 वर्ष से कम उम्र के वे बच्चे इस योजना से बाहर रहेंगे जिनका टिकट बिना सीट या बर्थ के लिया गया है।
यह सुविधा केवल आरक्षित श्रेणी के यात्रियों के लिए ही रहेगी; अनारक्षित द्वितीय श्रेणी और जनरल डिब्बों में सफर करने वाले करोड़ों यात्री अब भी इस बीमा दायरे से बाहर रहेंगे।
