गुजरात सरकार ने बुधवार को हाईकोर्ट में सोमनाथ मंदिर के आसपास मांसाहारी भोजन की बिक्री और उसके भंडारण पर लगी रोक का मजबूती से बचाव किया। राज्य सरकार ने कहा कि किसी भी तीर्थ स्थल के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्वरूप के मुकाबले व्यापार करने के अधिकार को प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।
गिर सोमनाथ जिले में मंदिर के 500 मीटर के दायरे में लगी इस पाबंदी को छह रेस्तरां संचालकों ने याचिका दायर कर चुनौती दी है। मामले की सुनवाई जस्टिस निशा एम. ठाकोर की बेंच के समक्ष चल रही है।
तीर्थ स्थल की पवित्रता का हवाला देकर सरकार ने सही ठहराया फैसला
सरकार की ओर से पेश हुए सरकारी वकील जी.एच. विर्क ने दलील दी कि देश भर के करोड़ों हिंदुओं के लिए सोमनाथ का बहुत बड़ा आध्यात्मिक महत्व है, लिहाजा इसे केवल एक साधारण व्यावसायिक शहर की तरह नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि कोई भी नागरिक मंदिर के प्रवेश द्वार पर या श्रद्धालुओं के आवागमन वाले रास्तों पर मांसाहार बेचने के पूर्ण मौलिक अधिकार का दावा नहीं कर सकता।
अदालत को जानकारी दी गई कि पिछले नौ महीनों के दौरान 1.16 करोड़ से अधिक श्रद्धालु सोमनाथ मंदिर के दर्शन करने पहुंचे हैं। इसके साथ ही सरकार ने हरिद्वार, ऋषिकेश, अमृतसर और मथुरा-वृंदावन जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों का भी उदाहरण दिया, जहां पहले से ही इस तरह की पाबंदियां लागू हैं।
सरकार का कहना था कि इस अधिसूचना से रेस्तरां को पूरी तरह बंद करने के लिए नहीं कहा गया है। ये प्रतिष्ठान चाहें तो उसी जगह पर पूरी तरह शाकाहारी रेस्तरां के रूप में अपना कामकाज जारी रख सकते हैं। इसके अलावा, नियमों के अनुसार तयशुदा निषेध क्षेत्र के बाहर मांसाहारी भोजन बेचने पर कोई मनाही नहीं है।
रेस्तरां संचालकों ने फैसले की वैधता पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे अगस्त में जारी सरकारी अधिसूचना के तहत बनाए गए छह निषिद्ध क्षेत्रों में से एक में आते हैं और प्रशासन ने जबरन उनकी दुकानें बंद करवा दी हैं। याचिका में इस आदेश को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत मिले आजीविका और व्यापार करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया गया है।
दुकानदारों का तर्क है कि वे वैध लाइसेंस के साथ कई दशकों से कानूनी तरीके से अपने रेस्तरां चला रहे हैं और उनके ठिकाने मंदिर के बिल्कुल करीब भी नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला मजिस्ट्रेट ने बिना कोई ठोस वजह बताए एक वैध व्यापार पर हमेशा के लिए रोक लगाकर अपने अधिकारों की सीमा लांघी है।
