लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने होमगार्ड भर्ती 2025 में आरक्षण नियमों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष रखने के लिए महाधिवक्ता को नोटिस जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि होमगार्ड भर्ती में चयन इस याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगा।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने संदीप कुमार त्रिपाठी समेत 16 अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल याचिका पर यह आदेश पारित किया। अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए दिसंबर में सूचीबद्ध करने का निर्देश भी दिया है।
याचिका में उत्तर प्रदेश लोक सेवाओं (शारीरिक रूप से दिव्यांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों और भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1993 के नियम 2(सी) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।
याचियों की ओर से अधिवक्ता केके पाल ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता स्वयं सेना से सेवानिवृत्त हुए हैं और उन्होंने भर्ती परीक्षा में भूतपूर्व सैनिक श्रेणी के तहत अपना परिणाम जारी किए जाने की मांग की है।
याचिका के अनुसार, संबंधित अभ्यर्थियों का परिणाम अभी तक जारी नहीं किया गया है। याचियों का तर्क है कि नियम के तहत उन्हें भूतपूर्व सैनिक नहीं मानना कानून की मंशा के विपरीत है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया है कि भर्ती प्रक्रिया में उन्हें भूतपूर्व सैनिक श्रेणी का लाभ देते हुए परिणाम जारी करने के संबंध में उचित निर्देश दिए जाएं।
UP पुलिस कांस्टेबल भर्ती विज्ञापन वर्ष 2025 एवं होमगार्ड भर्ती विज्ञापन वर्ष 2025 दोनों भर्तियों के रिजल्ट घोषित हो चुके है लेकिन भूतपूर्व सैनिक candidates ( जो स्वयं की रिक्वेस्ट पर डिस्चार्ज हुए थे ) के रिजल्ट घोषित नहीं हुए हैं,दोनों भर्तियों में भूतपूर्व सैनिको के रिजल्ट घोषित नहीं हुए हैं।
अदालत ने मामले पर राज्य सरकार का पक्ष जानने के लिए महाधिवक्ता को नोटिस जारी किया है। साथ ही, भर्ती प्रक्रिया में चयन को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखने का निर्देश दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में होगी।

