जनगणना 2027: अब प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों, बैंक और कंपनियों के कर्मचारियों की भी लग सकती है ड्यूटी

जनगणना 2027 के लिए केंद्र सरकार ने कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के साथ-साथ बैंकों और निजी कंपनियों के कर्मचारियों को भी जनगणना का काम सौंपा जा सकेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 16 अक्टूबर 2026 को अधिसूचना संख्या G.S.R. 896(E) जारी कर जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 लागू कर दिए हैं।

इन नियमों के जरिए जनगणना नियम, 1990 के नियम 3 में बदलाव किया गया है। यह नियम तय करता है कि किन लोगों को जनगणना के दौरान घर-घर जाकर जानकारी जुटाने वाले प्रगणक (Enumerator) के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।

नए नियमों में बिना सरकारी सहायता वाले निजी शिक्षण संस्थानों, बैंकों और कंपनियों के कर्मचारियों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। इसके अलावा राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को किसी भी उपयुक्त व्यक्ति को इस काम के लिए नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है।

यह अधिसूचना भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण के हस्ताक्षर से जारी हुई है। नए नियम सरकारी राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी हो गए हैं।

किन लोगों की लग सकती है जनगणना में ड्यूटी?

संशोधित नियमों के अनुसार, जनगणना के लिए मुख्य रूप से तीन श्रेणियों के लोगों को नियुक्त किया जा सकता है।

1. सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के शिक्षक

केंद्र या राज्य सरकार, स्थानीय निकायों, सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों और बिना सरकारी सहायता वाले निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को जनगणना का काम सौंपा जा सकता है।

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इसमें निजी संस्थाओं, समितियों और ट्रस्ट द्वारा संचालित स्कूलों तथा अन्य शिक्षण संस्थानों के शिक्षक भी शामिल हैं।

2. बैंक और निजी कंपनियों के कर्मचारी

नियमों में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय निकायों के क्लर्क तथा अन्य अधिकारियों के अलावा विभिन्न संस्थानों के कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है।

इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, वैधानिक निकाय, बैंक, कंपनियां, संस्थान, समितियां और ट्रस्ट शामिल हैं।

इस बदलाव के बाद निजी कंपनियों और बैंकों के कर्मचारियों को भी जनगणना के लिए प्रगणक नियुक्त किया जा सकता है।

3. राज्य सरकार द्वारा चुना गया कोई भी उपयुक्त व्यक्ति

संशोधित नियमों के तहत राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन ऐसे किसी भी व्यक्ति को प्रगणक नियुक्त कर सकता है, जिसे वह इस काम के लिए उपयुक्त समझता हो।

इसका मतलब है कि जनगणना की ड्यूटी केवल नियमों में बताई गई कर्मचारी श्रेणियों तक सीमित नहीं रहेगी।

जनगणना 2027 के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

जनगणना के दौरान देशभर में घर-घर जाकर जनसंख्या और अन्य संबंधित जानकारियां जुटाई जाती हैं। इस काम के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों की जरूरत होती है।

अब तक जनगणना के काम में मुख्य रूप से सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं ली जाती रही हैं।

नए नियमों से जनगणना के लिए कर्मचारियों का दायरा बढ़ गया है। जिला प्रशासन जरूरत के अनुसार निजी स्कूलों, बैंकों और कंपनियों से भी कर्मचारियों की सेवाएं ले सकेगा।

इसके साथ ही राज्य सरकारों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार अन्य उपयुक्त व्यक्तियों को नियुक्त करने की भी छूट मिलेगी।

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क्या जनगणना की ड्यूटी करने से इनकार किया जा सकता है?

जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत किसी व्यक्ति को विधिवत जनगणना अधिकारी नियुक्त किए जाने के बाद उसके लिए निर्धारित जिम्मेदारी निभाना कानूनी दायित्व बन जाता है।

कानून के अनुसार, जनगणना अधिकारी सार्वजनिक सेवक माने जाते हैं। बिना वैध कारण ड्यूटी करने से इनकार करने या निर्धारित काम में लापरवाही बरतने पर कानूनी कार्रवाई और दंड का प्रावधान है।

हालांकि, गंभीर बीमारी या किसी अन्य उचित कानूनी कारण के आधार पर संबंधित व्यक्ति नियुक्ति करने वाले अधिकारी के सामने अपनी परेशानी रख सकता है।

ऐसी स्थिति में कर्मचारी को अपनी समस्या लिखित रूप में संबंधित अधिकारी को बतानी चाहिए।

निजी स्कूलों, बैंकों और कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?

नियमों में बदलाव के बाद निजी शिक्षण संस्थानों, बैंकों और कंपनियों को भी जनगणना से जुड़े प्रशासनिक निर्देश मिल सकते हैं।

जिला प्रशासन इन संस्थानों से कर्मचारियों की जानकारी मांग सकता है या उन्हें जनगणना के काम के लिए उपलब्ध कराने को कह सकता है।

ऐसी स्थिति में संस्थानों को अपने नियमित कामकाज के साथ जनगणना ड्यूटी के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

वहीं, जिन कर्मचारियों को जनगणना की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, उन्हें नियुक्ति आदेश में दी गई शर्तों का पालन करना होगा। आवश्यक प्रशिक्षण में भी शामिल होना होगा।

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किसी कर्मचारी को नियुक्ति को लेकर वास्तविक परेशानी होने पर उसे ड्यूटी शुरू होने से पहले संबंधित अधिकारी के सामने लिखित आवेदन देना चाहिए।

किस कानून के तहत किए गए बदलाव?

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 18(1) के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं।

इसके जरिए जनगणना नियम, 1990 के नियम 3 की तालिका में क्रम संख्या 5 से संबंधित प्रावधानों को बदला गया है।

जनगणना नियम, 1990 में इससे पहले 1994, 2009, 2018 और 2022 में भी संशोधन किए जा चुके हैं। यह पांचवां संशोधन है।

स्पष्ट है कि नए नियमों के तहत प्राइवेट स्कूलों के शिक्षक, बैंक और कंपनियों के कर्मचारी जनगणना ड्यूटी के लिए नियुक्त किए जा सकेंगे। हालांकि, नियमों में किसी श्रेणी को शामिल किए जाने का मतलब यह नहीं है कि उस श्रेणी के सभी कर्मचारियों की ड्यूटी अनिवार्य रूप से लगाई जाएगी। वास्तविक नियुक्ति संबंधित प्रशासनिक आदेशों के आधार पर होगी।

नोट: यह खबर सरकारी अधिसूचना में किए गए बदलावों की सामान्य जानकारी देती है। इसे व्यक्तिगत कानूनी सलाह न माना जाए।

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