तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल स्थित अपने संसदीय क्षेत्र कृष्णानगर में दुर्गा पूजा के दौरान सरकारी सर्किट हाउस में ठहरने की अनुमति को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शीर्ष अदालत इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई करेगी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष जब यह मामला विचारार्थ आया, तब जस्टिस बागची ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ता अपने संसदीय क्षेत्र का दौरा करना चाहती हैं, तो इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जानी चाहिए।
सांसद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने तत्काल अंतरिम राहत देने की मांग उठाई। उन्होंने पीठ को बताया कि दुर्गा पूजा उत्सव शुक्रवार से प्रारंभ हो रहा है, इसलिए सांसद को क्षेत्र के दौरे के मद्देनजर जल्द अनुमति मिलना जरूरी है।
वहीं, राज्य सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दाखिल करने के लिए मामले को अगले हफ्ते तक टालने का अनुरोध किया। जब मोइत्रा के वकील ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मामले को बिना वजह टाला जा रहा है, तो सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यदि मामले को सनसनीखेज ही बनाना है, तो वे रातों-रात अपना जवाब दाखिल करने को तैयार हैं।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले भी जारी हो चुका है नोटिस
यह अर्जी महुआ मोइत्रा की उस मुख्य याचिका से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने संसदीय क्षेत्र के दौरे के दौरान पुख्ता सुरक्षा प्रदान करने की मांग की थी। उस याचिका पर पीठ ने 1 अक्टूबर को ही पश्चिम बंगाल सरकार तथा अन्य संबंधित पक्षों को अपना रुख स्पष्ट करने के निर्देश दिए थे।
मोइत्रा का आरोप है कि नादिया जिला प्रशासन के अधिकारियों ने वैध कमरा आवंटित होने के बावजूद उन्हें सरकारी सर्किट हाउस से बाहर निकाल दिया था।
अगस्त की घटना और लोकसभा स्पीकर से शिकायत
तृणमूल सांसद ने 14 अगस्त की रात सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी में दावा किया था कि जब उन्होंने सर्किट हाउस खाली करने से मना किया, तो परिसर के बाहर भारी भीड़ इकट्ठा हो गई और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने लगी। इसके बाद उन्होंने कथित उत्पीड़न के विरोध में अदालत जाने की बात कही थी।
इस घटना के बाद मोइत्रा ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर हस्तक्षेप का आग्रह किया था। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट किया था कि जब उन्होंने कमरा बुक किया अथवा चेक-इन किया, तब प्रशासन की ओर से बुकिंग पर किसी भी प्रकार की रोक या प्रतिबंध की कोई सूचना नहीं दी गई थी। सांसद ने यह सवाल भी उठाया था कि सर्किट हाउस ठीक जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक के आवासों के सामने स्थित है। ऐसे बेहद संवेदनशील और सुरक्षित क्षेत्र में किसी भी तरह की भीड़ कैसे जुट सकती है।

