इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सरकारी कर्मचारियों के वेतन संशोधन और बकाया भुगतान से जुड़े चार साल पुराने आदेश का पालन न करने के मामले में उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रमुख सचिव अजय चौहान के खिलाफ अवमानना का आरोप तय किया है।
जस्टिस सौरभ लवानिया की एकल पीठ ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को यह आदेश पारित किया। इसके साथ ही इस मामले में अवमानना के आरोपों का सामना कर रहे राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की संख्या पांच हो गई है।
इससे पहले हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर को अपर मुख्य सचिव (वित्त) दीपक कुमार और प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव, अनिल गर्ग तथा सौरभ बाबू के खिलाफ भी अवमानना के आरोप तय किए थे।
हाईकोर्ट ने सभी पांच अधिकारियों को आरोपों का जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया है। साथ ही उन्हें 4 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
चार साल बाद भी लागू नहीं हुआ हाईकोर्ट का आदेश
यह मामला सुरेश चंद्र वर्मा से जुड़े एक मुकदमे में 19 जुलाई 2022 को दिए गए फैसले के पालन से संबंधित है।
उस फैसले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं का वेतन दोबारा निर्धारित करने, बकाया राशि का भुगतान करने और संशोधित पेंशन संबंधी लाभ देने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि यदि चार महीने के भीतर कर्मचारियों को ये लाभ नहीं दिए जाते हैं, तो बकाया राशि पर 7 प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज देना होगा।
लेकिन याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि चार साल बीत जाने के बावजूद सरकार ने इन निर्देशों का पालन नहीं किया।
इसी आदेश को लागू कराने के लिए हाईकोर्ट में कुल 37 अवमानना याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
अधिकारियों के रवैये पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस सौरभ लवानिया ने कहा कि 19 जुलाई 2022 के आदेश का अब तक पालन नहीं किया गया है।
हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया यह भी पाया कि संबंधित अधिकारी रिट कोर्ट के निर्देशों को लागू करने के इच्छुक नहीं दिखाई देते हैं।
इससे पहले राज्य सरकार ने आदेश का पालन करने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने यह अनुरोध खारिज कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट भी बरकरार रख चुका है फैसला
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस बात का भी उल्लेख किया कि 2022 के मूल आदेश को पहले विशेष अपील में बरकरार रखा गया था।
इसके बाद 13 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भी उस फैसले को बरकरार रखा। राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिकाएं भी खारिज हो चुकी हैं।
इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें अब तक वेतन संशोधन, बकाया भुगतान और संशोधित पेंशन का लाभ नहीं मिला है।
अब पांच वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अवमानना के आरोप तय होने के बाद हाईकोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को करेगा। सभी संबंधित अधिकारियों को उस दिन व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहना होगा।

