बॉम्बे हाईकोर्ट ने रविवार रात एक विशेष सुनवाई के बाद गोवा पुलिस की हिरासत से कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के छह कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आजाद मैदान में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने इन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था।
अवैध हिरासत के खिलाफ अधिवक्ता मेलिसा सिमोस द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जमसांडेकर की खंडपीठ ने रात 7:30 बजे से 8:45 बजे तक सुनवाई की। इस आपातकालीन सुनवाई के लिए दोनों न्यायाधीश और अदालत के कर्मचारी विशेष रूप से उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान ऑनलाइन माध्यम से जुड़े लोक अभियोजक ने पीठ को भरोसा दिलाया कि होटल कारोबारी जैक सुखीजा, अमरीन शेख, आदित्य पारुलेकर और भूपेश बिन सहित सभी छह लोगों को बिना किसी देरी के रिहा कर दिया जाएगा। अदालत अब इस मामले में सोमवार को अगली सुनवाई करेगी।
पुलिस से मांगा जवाब, मेडिकल जांच की अनुमति
याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता नोरमा अल्वारेस ने अदालत को एक मुचलका सौंपा कि रिहा किए गए कार्यकर्ता रविवार रात कोई प्रदर्शन नहीं करेंगे और न ही आजाद मैदान लौटेंगे। अल्वारेस ने स्पष्ट किया कि यह वचनबद्धता केवल उसी रात के लिए सीमित थी क्योंकि मामले की विस्तृत सुनवाई अगले दिन तय थी।
अदालत ने हिरासत के दौरान दो कार्यकर्ताओं के चोटिल होने की जानकारी सामने आने पर कहा कि यदि वे चाहें तो गोवा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में उनका चिकित्सीय परीक्षण कराया जा सकता है। इसके साथ ही खंडपीठ ने पणजी और पेडणे (पर्नेम) पुलिस थानों के प्रभारियों को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। अदालत ने पुलिस से पूछा है कि कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के क्या कारण थे और उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति क्यों नहीं दी गई।
हिरासत और थाने बदलने पर कार्यकर्ताओं के आरोप
रिहाई के बाद जैक सुखीजा ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर कोई रोक नहीं है, फिर भी पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे लोगों को पकड़ लिया। सुखीजा ने आरोप लगाया कि उन्हें पहले पणजी से उठाया गया और फिर पेडणे पुलिस थाने ले जाया गया। हिरासत के दौरान उनके फोन जब्त कर लिए गए और किसी से संपर्क करने की इजाजत भी नहीं दी गई।
प्रदर्शन की अनुमति खारिज होने पर सड़कों पर उतरे लोग
अधिवक्ता अल्वारेस के अनुसार, पार्टी ने 7 अक्टूबर को आजाद मैदान में सभा आयोजित करने के लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी थी, जिसे प्रशासन ने 9 अक्टूबर को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया था।
रविवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही पुलिस ने आजाद मैदान की ओर बढ़ रहे कई प्रदर्शनकारियों को रोक लिया और कई लोगों को हिरासत में ले लिया। प्रशासन ने कार्यकर्ताओं के साथ-साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश फर्डिन रिबेलो को भी मैदान के भीतर जाने से रोक दिया। इसके चलते प्रदर्शनकारी आसपास की मुख्य सड़क पर आ गए और गोवा पुलिस मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।
इस दौरान पूर्व मुख्य न्यायाधीश रिबेलो ने पुलिसिया कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि आजाद मैदान में प्रवेश करना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने गोवा की मुक्ति के लिए संघर्ष किया था, और आज की लड़ाई चुनाव आयोग द्वारा सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ है।

