इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक लाख फैसलों का हिंदी में अनुवाद पूरा कर लिया है। ये सभी फैसले अब हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर मुफ्त उपलब्ध हैं। इस उपलब्धि को चिह्नित करने के लिए 5 अक्टूबर 2026 को आयोजित कार्यक्रम में चीफ जस्टिस अरुण भंसाली ने खुद एक लाखवां अनुवादित फैसला वेबसाइट पर अपलोड किया।
इस मौके पर हाईकोर्ट ने The Vernacular Voice of Justice नाम से एक विशेष स्मारिका भी जारी की। इसमें अगस्त 2023 में पहले फैसले के हिंदी अनुवाद से लेकर एक लाख फैसलों का अनुवाद पूरा होने तक की यात्रा को शामिल किया गया है।
इस स्मारिका का प्रकाशन चीफ जस्टिस अरुण भंसाली के संरक्षण में एआई असिस्टेड लीगल ट्रांसलेशन एडवाइजरी, ई-एएचसीआर और आईएलआर कमेटी ने किया है।
कई जजों की मौजूदगी में अपलोड हुआ एक लाखवां फैसला
इस उपलब्धि पर आयोजित कार्यक्रम में हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति के सदस्य जस्टिस अरिंदम सिन्हा, जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा मौजूद रहे।
इसके अलावा एआई असिस्टेड लीगल ट्रांसलेशन एडवाइजरी, ई-एएचसीआर और आईएलआर कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस अजित कुमार, सदस्य जस्टिस समीर जैन और जस्टिस विक्रम डी. चौहान भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
चीफ जस्टिस अरुण भंसाली ने एक लाखवां अनुवादित फैसला वेबसाइट पर अपलोड किया। इस अवसर पर अन्य जजों ने भी अपने-अपने फैसले अपलोड किए।
जस्टिस अजित कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में अनुवाद कार्य से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के योगदान की सराहना की गई।
चीफ जस्टिस और अन्य जजों ने कहा कि इस पहल से आम लोगों और वकीलों के लिए न्यायिक फैसलों को समझना और उन तक पहुंचना आसान होगा।
कार्यक्रम में जस्टिस विक्रम डी. चौहान ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल मनजीत सिंह श्योराण सहित रजिस्ट्री के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
अगस्त 2023 में शुरू हुआ था हिंदी अनुवाद का काम
इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुवास सेल की स्थापना 16 अगस्त 2023 को हुई थी। यह पहल भारत के पूर्व चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ के कार्यकाल में शुरू किए गए प्रयासों का हिस्सा थी।
जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने 23 जनवरी 2023 को देश के सभी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर एआई की मदद से फैसलों के अनुवाद की निगरानी के लिए समितियां बनाने को कहा था।
इसका उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों को क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराना था, ताकि आम लोगों के साथ-साथ युवा वकीलों को भी अपनी भाषा में कानूनी जानकारी मिल सके।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का पहला हिंदी अनुवादित फैसला 23 अगस्त 2023 को वेबसाइट पर अपलोड किया गया था।
इसके बाद 12 दिसंबर 2025 को अनुवादित फैसलों की संख्या 50 हजार पहुंच गई। उस समय भी चीफ जस्टिस अरुण भंसाली ने 50 हजारवां फैसला अपलोड किया था।
हाईकोर्ट ने 17 मार्च 2026 से अनुवाद का दायरा और बढ़ाया। इसके तहत तीन या उससे अधिक पन्नों वाले सभी अंतिम गैर-रिपोर्टेबल फैसलों और आदेशों का भी हिंदी अनुवाद शुरू किया गया।
वर्तमान में इलाहाबाद और लखनऊ के सुवास सेल हाईकोर्ट के सभी रिपोर्टेबल फैसलों, निर्धारित श्रेणी के अंतिम गैर-रिपोर्टेबल फैसलों और आदेशों तथा सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का हिंदी अनुवाद कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के 9,161 फैसलों का भी किया गया अनुवाद
इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक लाख फैसलों के अलावा सुवास सेल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी बड़े स्तर पर अनुवाद किया है।
हाईकोर्ट की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, सुवास सेल ने ढाई महीने से कुछ अधिक समय में सुप्रीम कोर्ट के 9,161 फैसलों का अनुवाद करके 25 नवंबर 2023 तक सुप्रीम कोर्ट को उपलब्ध कराया था।
इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश से जुड़े और सुप्रीम कोर्ट रिपोर्ट्स में प्रकाशित 363 फैसलों का भी हिंदी अनुवाद किया गया है।
26 सितंबर 2025 से बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेशों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के 28 फैसलों और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के तीन फैसलों का भी अनुवाद किया गया है।
ऐतिहासिक फैसलों की हिंदी ई-पुस्तकें भी उपलब्ध
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसलों के अनुवाद के साथ-साथ हिंदी में कानूनी सामग्री उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल प्रकाशन भी शुरू किए हैं।
संविधान दिवस के अवसर पर 26 नवंबर 2024 को न्यायाभा – न्याय की किरण नाम से त्रैमासिक ई-पत्रिका की शुरुआत की गई थी।
इसमें जजों, वकीलों, न्यायिक अधिकारियों, कानून के जानकारों, शोधकर्ताओं और छात्रों के लेख, भाषण तथा अन्य कानूनी सामग्री को एआई की मदद से हिंदी में अनुवाद करके प्रकाशित किया जाता है।
सितंबर 2026 तक इस पत्रिका के सात संस्करण प्रकाशित हो चुके थे।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसलों के हिंदी अनुवाद वाली छह ई-पुस्तिकाएं भी जारी की हैं।
इनमें चौरी-चौरा मामला, केशव सिंह मामला, आगरा षड्यंत्र मामला, कानपुर बम विस्फोट मामला, राज नारायण बनाम इंदिरा नेहरू गांधी मामला और पॉक्सो कानून से जुड़ा जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस मामला शामिल हैं।
ये ई-पुस्तिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के ई-एएचसीआर सेक्शन में मुफ्त उपलब्ध हैं।
यह पूरा अनुवाद प्रोजेक्ट इलाहाबाद और लखनऊ के सुवास सेल द्वारा चीफ जस्टिस अरुण भंसाली के संरक्षण में चलाया जा रहा है। इसकी देखरेख जस्टिस अजित कुमार की अध्यक्षता वाली समिति कर रही है, जिसमें जस्टिस समीर जैन, जस्टिस विक्रम डी. चौहान और जस्टिस विवेक कुमार सिंह सदस्य हैं।

