नियोक्ता की गलती से मिला अतिरिक्त वेतन रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी से नहीं वसूला जा सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी कर्मचारी को सेवा के दौरान अतिरिक्त वेतन नियोक्ता की गलती से मिला हो और उसमें कर्मचारी की ओर से कोई धोखाधड़ी या गलत जानकारी देना शामिल न हो, तो रिटायरमेंट के बाद उस रकम की वसूली नहीं की जा सकती।

जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने बेंगलुरु इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी लिमिटेड (बेसकॉम) को रिटायर्ड असिस्टेंट लाइनमैन मंजूनाथ एन से वसूले गए ₹2,81,887 वापस करने का निर्देश दिया। यह रकम करीब 15 साल पहले कथित रूप से गलत तरीके से दिए गए एक इंक्रीमेंट से जुड़ी थी।

मंजूनाथ 30 अप्रैल 2025 को रिटायर हुए थे। इसके बाद बेसकॉम ने यह कहते हुए उनकी पेंशन से रकम की वसूली की कि उन्हें पहले अतिरिक्त भुगतान किया गया था।

मंजूनाथ की ओर से पेश वकील देवराज एन ने दलील दी कि अतिरिक्त भुगतान किसी धोखाधड़ी या गलत जानकारी के कारण नहीं हुआ था, बल्कि बेसकॉम की अपनी गलती से हुआ था।

बेसकॉम ने भी अदालत के सामने स्वीकार किया कि यदि किसी रिटायर्ड कर्मचारी की ओर से धोखाधड़ी या गलत जानकारी देने का मामला नहीं हो, तो उससे ऐसी रकम की वसूली नहीं की जा सकती।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा

हाईकोर्ट ने Jogeswar Sahoo vs District Judge, Cuttack (2025) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख किया।

सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले में कहा था कि यदि अतिरिक्त भुगतान कर्मचारी की ओर से किसी गलत जानकारी या धोखाधड़ी के कारण नहीं हुआ हो, तो उसकी वसूली नहीं की जा सकती। इसी तरह, यदि नियोक्ता ने वेतन या भत्ते की गणना में गलत सिद्धांत अपनाया हो या किसी नियम अथवा आदेश की ऐसी व्याख्या की हो जो बाद में गलत पाई गई, तो भी अतिरिक्त भुगतान कर्मचारी से वापस नहीं लिया जा सकता।

हाईकोर्ट ने पाया कि मंजूनाथ पर न तो धोखाधड़ी का आरोप था और न ही यह कहा गया कि उन्होंने अतिरिक्त रकम पाने के लिए कोई गलत जानकारी दी थी।

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25 सितंबर के अपने आदेश में अदालत ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में कर्मचारी को दिए गए अतिरिक्त वेतन या भत्ते की वसूली नहीं की जा सकती।

हाईकोर्ट ने बेसकॉम को निर्देश दिया कि वह मंजूनाथ से वसूले गए ₹2,81,887 ब्याज सहित आठ सप्ताह के भीतर वापस करे।

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