सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली स्थित ऐतिहासिक 135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने सरकार को हलफनामा पेश कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि 8.5 लाख से अधिक दुर्लभ पुस्तकों वाले इस संस्थान के लिए कितनी जगह आवंटित की जाएगी और इसका वास्तविक लेआउट प्लान क्या होगा।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने इस मामले में सोमवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। शीर्ष अदालत ने इस याचिका को ‘इन री: 135-ईयर-ओल्ड लाइब्रेरी, 8.5 लाख बुक्स-एंड नो रूम इन द न्यू सेंट्रल विस्टा प्लान’ शीर्षक के तहत दर्ज किया है। मामले में केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुईं।
जगह आवंटन को लेकर उपजा विवाद
सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप उन मीडिया रिपोर्टों के बाद सामने आया है, जिनमें नए सेंट्रल विस्टा प्लान के तहत पुस्तकालय के लिए पर्याप्त स्थान न मिलने की आशंका जताई गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 1969 से शास्त्री भवन की चार मंजिलों में संचालित हो रहे इस पुस्तकालय के भविष्य पर उस समय संशय पैदा हो गया, जब आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा कर्तव्य भवन-2 परिसर में इसके लिए केवल दो कमरे आवंटित किए जाने की बात सामने आई।
आवास मंत्रालय ने दी सफाई
स्थान की कमी से जुड़ी खबरों के बीच केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना में सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के लिए बाकायदा जगह का प्रावधान किया गया है। अब केंद्र सरकार द्वारा विस्तृत लेआउट और आवंटित क्षेत्रफल का विवरण अदालत में दाखिल किए जाने के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

