कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें निर्वाचन आयोग द्वारा ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह नवगठित डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (DTC) को आवंटित किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। जस्टिस कृष्णा राव ने अदालत में फैसला सुनाते हुए नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व वाली पार्टी की अर्जी निरस्त कर दी।
चुनाव चिन्ह फ्रीज करने की थी मांग
ISF ने अपनी याचिका में चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा था कि क्या यह आयोग के अधिकारों का उचित इस्तेमाल है। पार्टी ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी कि आयोग द्वारा ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह को फ्रीज किया जाए। ISF की दलील थी कि उसने 2024 के लोकसभा चुनाव और 2026 के विधानसभा चुनाव इसी ‘लिफाफा’ सिंबल पर लड़े थे, लेकिन उसकी औपचारिक आपत्ति के बावजूद आयोग ने यह चिन्ह DTC को आवंटित कर दिया।
ISF को मिला ‘अलमारी’ चुनाव चिन्ह
हालिया चुनाव चिन्ह आवंटन में निर्वाचन आयोग ने ISF को ‘लिफाफा’ के बजाय ‘अलमारी’ सिंबल आवंटित किया है।
गैर-मान्यता प्राप्त दलों के नियमों का हवाला
अदालत में सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग के वकील ने कहा कि ISF को ‘लिफाफा’ सिंबल का इस्तेमाल केवल दो चुनावों के लिए ही आवंटित किया गया था। आयोग ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि ISF एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। इसलिए, भाजपा या कांग्रेस जैसी मान्यता प्राप्त पार्टियों की तरह उसके पास किसी निश्चित चुनाव चिन्ह को अपने पास रखने का कानूनी अधिकार नहीं है।

