अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की तारीख बदलने के नाम पर यात्रियों से मनमाना अतिरिक्त शुल्क वसूलना एक निजी ट्रैवल एजेंसी को भारी पड़ गया है। दिल्ली के एक जिला उपभोक्ता आयोग ने एजेंसी के आचरण को ‘मिस-सेलिंग’ और सेवा में गंभीर लापरवाही मानते हुए चार यात्रियों को टिकट के पूरे 5,43,551 रुपये 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही आयोग ने मानसिक प्रताड़ना के एवज में 30,000 रुपये का मुआवजा और 20,000 रुपये कानूनी खर्च के रूप में चुकाने का निर्देश दिया है।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (दक्षिण-II), नई दिल्ली की पीठ ने यह फैसला सुनाया। इस पीठ में अध्यक्ष मोनिका अग्रवाल श्रीवास्तव के अलावा सदस्य डॉ. राजेंद्र धर और रितु गरोदिया शामिल थीं। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यात्रा की तारीख बदलने के लिए एजेंसी द्वारा 14 मई 2024 को 2.98 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग करना पूरी तरह अनुचित, अवांछित और निराधार था। आयोग के अनुसार, कंपनी ने ग्राहकों से अधिक पैसे ऐंठने के इरादे से भ्रामक दावे किए, जो अनुचित व्यापार व्यवहार और छुपे हुए शुल्कों को छिपाने का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
‘ओपन टिकट’ का आश्वासन देकर बेचे थे टिकट
यह विवाद 6 अप्रैल 2024 को शुरू हुआ, जब चार यात्रियों ने दिल्ली से हेलसिंकी होते हुए एम्स्टर्डम जाने और वापस लौटने के लिए 5,43,551 रुपये का भुगतान कर एयर टिकट बुक कराए थे। उनका प्रस्थान 20 अप्रैल और वापसी 27 अप्रैल तय थी।
शिकायत के मुताबिक, बुकिंग से पहले ट्रैवल एजेंसी ने यात्रियों को भरोसा दिलाया था कि ये टिकट ‘ओपन टिकट’ श्रेणी में आते हैं। उन्हें आश्वस्त किया गया था कि बुकिंग के एक वर्ष के भीतर वे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क, एयरलाइन जुर्माने या रीशेड्यूलिंग चार्ज के अपनी यात्रा की तारीखों में बदलाव कर सकते हैं।
वीजा में देरी और अतिरिक्त पैसों की मांग
निर्धारित यात्रा से दो दिन पहले, यानी 18 अप्रैल 2024 को यात्रियों को पता चला कि उनका वीजा समय पर तैयार नहीं हो पाएगा। यात्रियों ने तुरंत एजेंसी के साथ बने एक समर्पित व्हाट्सएप ग्रुप पर इसकी जानकारी दी और आगे की किसी तारीख के लिए टिकट बदलने का अनुरोध किया।
यात्रियों को 27 अप्रैल 2024 को वीजा मिल गया। इसके बाद जब उन्होंने यात्रा की नई तारीखें तय करने की बात कही, तो एजेंसी ने 14 मई 2024 को रीशेड्यूलिंग के लिए 2.98 लाख रुपये के अतिरिक्त भुगतान की मांग रख दी। इस अप्रत्याशित मांग से परेशान होकर यात्रियों ने यात्रा न करने का फैसला किया और अपने पूरे 5.43 लाख रुपये वापस मांगे।
ट्रैवल एजेंसी का बचाव और आयोग का निष्कर्ष
उपभोक्ता आयोग के समक्ष ट्रैवल कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए शिकायत रद्द करने की मांग की। एजेंसी ने दलील दी कि उसने केवल एक एजेंट के तौर पर टिकट बुक कराने में मध्यस्थता की थी और वीजा जारी करने या एयरलाइंस के रीशेड्यूलिंग नियमों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं था। एजेंसी ने यह भी दावा किया कि टिकट नॉन-रिफंडेबल थे, तारीख बदलने पर किराए का अंतर और एयरलाइन नियम लागू होने की बात पहले ही बता दी गई थी, तथा ओपन टिकट का कोई वादा नहीं किया गया था।
यात्रियों ने अपने पक्ष में भुगतान रसीदें, टिकट की प्रतियां और कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ हुई व्हाट्सएप बातचीत के ब्योरे साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए।
सभी दस्तावेजों की जांच के बाद आयोग ने पाया कि यात्रियों ने यह मानकर ही टिकट खरीदे थे कि वे ओपन टिकट हैं, और व्हाट्सएप चैट से यह पूरी तरह स्पष्ट है। आयोग ने कहा कि अतिरिक्त शुल्क की अनुचित मांग के कारण ही यात्रियों को अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ी।
60 दिनों में भुगतान करने का निर्देश
आयोग ने ट्रैवल एजेंसी को निर्देश दिया कि वह शिकायत दर्ज करने की तिथि यानी 19 सितंबर 2024 से वास्तविक भुगतान तक 5,43,551 रुपये की पूरी राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करे। इसके अतिरिक्त 30,000 रुपये क्षतिपूर्ति और 20,000 रुपये मुकदमा खर्च भी देना होगा।
कंपनी को आदेश की प्रति मिलने के 60 दिनों के भीतर इन निर्देशों का पालन करना होगा। तय समय सीमा में राशि न चुकाने पर कंपनी को डिफ़ॉल्ट की तारीख से पूरी राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना पड़ेगा।

