इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में जातिगत भेदभाव के आरोपों से जुड़ी याचिका की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले की जांच न्यायिक अधिकारियों को सौंपने के एकल पीठ के आदेश पर असहमति जताते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया इन शिकायतों की पड़ताल विश्वविद्यालय के आंतरिक ‘समान अवसर प्रकोष्ठ’ (इक्वल अपॉर्चुनिटी सेल) को ही करनी चाहिए।
जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश विश्वविद्यालय के विधि विभागाध्यक्ष एवं छात्रावास वार्डन दीपक शर्मा की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
आंतरिक प्रकोष्ठ के अधिकार क्षेत्र का किया समर्थन
खंडपीठ ने अपने 23 सितंबर के आदेश में स्पष्ट किया कि जब विश्वविद्यालय में समान अवसर प्रकोष्ठ पहले से कार्यरत है और याचिकाकर्ता छात्रों ने भी अपीलकर्ता को अलग रखते हुए इसी प्रकोष्ठ से जांच कराने का अनुरोध किया था, तब न्यायिक अधिकारियों द्वारा जांच कराने का कोई औचित्य नहीं था।
अदालत ने टिप्पणी की कि आरोप भले ही गंभीर प्रकृति के हों, लेकिन विश्वविद्यालय का यह अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए कि वह उचित रूप से गठित प्रकोष्ठ के जरिए ऐसे मामलों की जांच करे। कोर्ट ने रेखांकित किया कि विद्यार्थियों का कल्याण सुनिश्चित करना और परिसर से जुड़ी परिस्थितियों व विवादों को संभालना पूरी तरह से विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है।
छात्रों की शिकायत और एकल पीठ का पिछला आदेश
यह विवाद विश्वविद्यालय के दो विद्यार्थियों—एक पीएचडी शोधार्थी और पंचम सेमेस्टर के बीए एलएलबी (ऑनर्स) छात्र—की लिखित शिकायतों के बाद सामने आया था। दोनों छात्रों ने आरोप लगाया था कि दीपक शर्मा ने अपने अकादमिक और प्रशासनिक पद का दुरुपयोग कर उन्हें जातिगत रूप से अपमानित किया और बदले की भावना से कार्रवाई की।
इन शिकायतों पर सुनवाई करते हुए एकल पीठ ने 16 सितंबर 2026 को प्रयागराज की लघु वाद अदालत की जज अर्चना सिंह-I और विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अरुण कुमार यादव को जांच सौंपते हुए 24 सितंबर तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। एकल पीठ ने तब कहा था कि वह आरोपों की सत्यता पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रही है, लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए किसी निष्पक्ष एजेंसी से पड़ताल कराया जाना आवश्यक है।
सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
एकल पीठ के इस निर्देश के खिलाफ दीपक शर्मा ने खंडपीठ के समक्ष विशेष अपील दाखिल की और दलील दी कि आंतरिक प्रकोष्ठ की मौजूदगी में बाहरी न्यायिक जांच अनावश्यक है।
खंडपीठ ने निर्देश दिया है कि यदि न्यायिक अधिकारियों की जांच रिपोर्ट 24 सितंबर की तय समय-सीमा तक तैयार हो चुकी है, तो उसे 29 सितंबर को सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। अदालत इस मामले पर 29 सितंबर को अगली सुनवाई करेगी।

