आपसी सहमति से तलाक के बाद दोबारा शादी करने वाले दंपति की शांतिपूर्ण जिंदगी में कोई दखल नहीं दे सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आपसी सहमति से तलाक लेने के बाद दोबारा शादी कर अपने दो बच्चों के साथ रह रहे दंपति की शांतिपूर्ण जिंदगी में कोई भी निजी या सार्वजनिक व्यक्ति बाधा नहीं डाल सकता। जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के Lata Singh v. State of U.P. मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं को संरक्षण देने की बात कही।

याचिकाकर्ताओं ने लखनऊ बेंच के समक्ष याचिका दाखिल कर अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की थी कि याचिकाकर्ता नंबर 2 के पिता के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए और उनके वैवाहिक जीवन में किसी तरह का हस्तक्षेप न होने दिया जाए। उन्होंने अपनी शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए भी पुलिस सुरक्षा की मांग की थी।

आपसी तलाक के बाद फिर की शादी

फैसले के अनुसार, दोनों याचिकाकर्ता पहले पति-पत्नी थे और उनके दो बच्चे हैं। आपसी छोटे-मोटे विवादों के कारण उन्होंने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-B के तहत आपसी सहमति से तलाक की अर्जी दाखिल की और तलाक की डिक्री प्राप्त कर ली।

कुछ समय बाद दोनों ने पूरे परिवार के हित में फिर से साथ रहने का निर्णय लिया और 2 अप्रैल 2026 को आर्य समाज मंदिर में दोबारा शादी कर ली। इस संबंध में विवाह प्रमाणपत्र भी याचिका के साथ दाखिल किया गया था।

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याचिकाकर्ताओं का कहना था कि याचिकाकर्ता नंबर 2 के पिता इस शादी से सहमत नहीं हैं और उन्हें आशंका है कि वह उनके शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में बाधा डाल सकते हैं।

शांतिपूर्ण जीवन में कोई बाधा नहीं डाल सकता

हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ता पहले भी पति-पत्नी थे, उनके दो बच्चे हैं और आपसी तलाक के बाद उन्होंने फिर से शादी कर ली है तथा अपने बच्चों के साथ रह रहे हैं।

कोर्ट ने कहा:

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“कोई भी व्यक्ति उनके शांतिपूर्ण जीवन में किसी तरह की बाधा नहीं डाल सकता, चाहे वह निजी व्यक्ति हो या सार्वजनिक व्यक्ति।”

बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के Lata Singh मामले के फैसले का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि बालिग व्यक्ति अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी करने के लिए स्वतंत्र है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को उद्धृत करते हुए हाईकोर्ट ने कहा:

“यह एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश है और जब कोई व्यक्ति बालिग हो जाता है, तो वह अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति से शादी कर सकता है।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि परिवार इस तरह की शादी से सहमत नहीं है, तो वह सामाजिक संबंध समाप्त कर सकता है, लेकिन दंपति को धमकी, उत्पीड़न या हिंसा का शिकार नहीं बनाया जा सकता।

शादी की संस्था को हल्के में न लें: कोर्ट

मामले का निस्तारण करते हुए हाईकोर्ट ने दंपति के पहले तलाक लेने और फिर दोबारा शादी करने की परिस्थितियों पर भी टिप्पणी की।

बेंच ने कहा:

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“विवाह की पवित्र संस्था को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए और छोटे-मोटे विवादों के कारण आपसी तलाक लेना तथा बाद में दोबारा शादी करना, जबकि दंपति के दो बच्चे भी हैं, वास्तव में खेदजनक स्थिति है।”

हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Lata Singh मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया संरक्षण याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध रहेगा।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने रिट याचिका का निस्तारण कर दिया।

केस टाइटल: रूपा रानी व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, प्रमुख सचिव गृह के माध्यम से व 3 अन्य

केस नंबर: क्रिमिनल मिस. रिट पिटीशन नंबर 9388 ऑफ 2026

बेंच: जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा

तारीख: 23 सितंबर 2026

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