झारखंड हाईकोर्ट ने बड़गाईं जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका पर बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सोरेन ने याचिका दायर कर रांची स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में उनके खिलाफ चल रही अदालती कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की है।
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की पीठ ने दोनों पक्षों की विस्तृत बहस सुनने के बाद निचली अदालत की कार्यवाही स्थगित करने के बिंदु पर आदेश सुरक्षित रखा। सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दोनों के अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं।
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे मुख्यमंत्री
यह मामला विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा 8 जून को हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका खारिज किए जाने से जुड़ा है। कानूनी प्रक्रिया के तहत डिस्चार्ज याचिका किसी आरोपी द्वारा अदालत में औपचारिक आरोप तय किए जाने से पहले आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग के लिए दायर की जाती है।
निचली अदालत से याचिका खारिज होने के बाद सोरेन ने 31 अगस्त को हाईकोर्ट का रुख किया था। इससे पहले सुनवाई के दौरान सोरेन की ओर से निचली अदालत की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने का आग्रह किया गया था, जिसे हाईकोर्ट ने 9 सितंबर को स्वीकार नहीं किया और ईडी को मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।
8.86 एकड़ जमीन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोप
प्रवर्तन निदेशालय ने रांची के बड़गाईं अंचल में 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और हस्तांतरण को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग का यह केस दर्ज किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि उक्त जमीन का फर्जी और गैरकानूनी तरीके से सोरेन के पक्ष में हस्तांतरण किया गया था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है।
इस मामले में जहां हेमंत सोरेन की अर्जी पर हाईकोर्ट का निर्णय आना बाकी है, वहीं विशेष पीएमएलए अदालत पहले ही 17 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर चुकी है। इन आरोपियों में आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह और अंतु तिर्की समेत 15 अन्य लोग शामिल हैं।

