सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश में तेंदुओं के कथित शिकार से जुड़े मामले में पशु कल्याण संस्था ‘वाइल्डलाइफ एसओएस’ के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कार्तिक सत्यनारायण की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। इस याचिका में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत सत्यनारायण की गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक हटा ली गई थी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए पेश किया। इस पर चीफ जस्टिस ने सहमति जताते हुए कहा कि मामले को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
हाईकोर्ट का आदेश और वन विभाग के आरोप
यह विवाद मध्य प्रदेश के श्योपुर और मुरैना जिलों में 10 तेंदुओं के कथित शिकार की जांच से जुड़ा है, जिसकी पड़ताल राज्य की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) कर रही है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत दायर दो याचिकाओं को खारिज करते हुए सत्यनारायण को मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने उन्हें 21 सितंबर को एसटीएसएफ के समक्ष पेश होने का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट ने यह कदम मध्य प्रदेश वन विभाग की उन दलीलों के बाद उठाया, जिनमें दावा किया गया था कि सत्यनारायण ने अपने खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट और तीसरे समन की जानकारी अदालत से छिपाई। वन विभाग का यह भी आरोप था कि वह जांच प्रक्रिया में शामिल नहीं हो रहे हैं।
वाइल्डलाइफ एसओएस की दलीलें और सुप्रीम कोर्ट में पक्ष
सत्यनारायण और वाइल्डलाइफ एसओएस ने जांच एजेंसियों द्वारा उन्हें “फरार” बताए जाने के दावे का कड़ा विरोध किया है। संगठन का कहना है कि उनकी एंटी-पोचिंग विंग ने खुद उत्तर प्रदेश के आगरा में तेंदुओं की खालें बरामद करवाकर इस गिरोह का पर्दाफाश करने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सक्रिय मदद की थी। संगठन के अनुसार, कानून के दायरे में रहकर विधिक संरक्षण की मांग करने का मतलब जांच में असहयोग करना नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट में दलील पेश करते हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि उनके मुवक्किल की संस्था ने अधिकारियों की मदद कर खालें बरामद करवाई थीं, लेकिन बाद में मध्य प्रदेश के अधिकारियों ने उनके ही प्रमुख को इस मामले में आरोपी बना दिया।
सुनवाई के दौरान जब पीठ ने पूछा कि क्या तेंदुए उनके घर पर रखे गए थे, तो दवे ने स्पष्ट किया कि ऐसा बिल्कुल नहीं था। उन्होंने बताया कि संस्था की अगुवाई में उत्तर प्रदेश के आगरा में खालों की बरामदगी हुई थी, जिसके बाद इस मामले को मध्य प्रदेश में आगे बढ़ाया गया।
दवे ने पीठ के समक्ष यह भी कहा कि सत्यनारायण जांच में पूरा सहयोग देने और जांच एजेंसी के सामने पेश होने के लिए तैयार हैं, बशर्ते उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह राहत मामले से जुड़ी सभी कार्यवाहियों पर लागू होनी चाहिए, क्योंकि यदि एक मामले में सुरक्षा मिले और दूसरे में उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए, तो पेश होने का कोई औचित्य नहीं रहेगा।
