दिल्ली के मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने गुरुग्राम में एक सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले 27 वर्षीय युवक के परिजनों को 66.89 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। न्यायाधिकरण ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आदेश दिया कि वह याचिका दायर होने की तारीख से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज जोड़कर पूरी राशि 30 दिनों के भीतर जमा कराए।
यह फैसला पीठासीन अधिकारी विक्रम ने मृतक रमाकांत शर्मा के परिजनों की ओर से दायर दावा याचिका पर सुनवाई करते हुए 3 सितंबर को सुनाया। अपने आदेश में न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में पेश साक्ष्यों से यह साबित होता है कि यह घातक दुर्घटना ट्रक चालक द्वारा वाहन को तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाने के कारण हुई थी।
हादसे और इलाज का विवरण
दुर्घटना 6 दिसंबर 2023 की रात को हुई थी। उस समय रमाकांत शर्मा गुरुग्राम के सेक्टर 18 से अपनी मोटरसाइकिल पर घर लौट रहे थे। रास्ते में एक ट्रक ने पीछे से उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए।
हादसे के तुरंत बाद उन्हें गुरुग्राम और दिल्ली के अस्पतालों में ले जाया गया। गंभीर चोटों के कारण 8 दिसंबर 2023 को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का मुख्य कारण किसी भारी वस्तु के आघात से सिर और मस्तिष्क में पहुंची गंभीर क्षति (क्रैनियो-सेरेब्रल डैमेज) बताया गया।
मुआवजे का आकलन और वितरण
मृतक पर आश्रित पांच परिजनों—उनकी पत्नी, दो बेटियों, मां और पिता—ने मिलकर न्यायाधिकरण के समक्ष मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी। रमाकांत की मासिक आय 29,800 रुपये थी, जिसके आधार पर न्यायाधिकरण ने परिवार की निर्भरता के नुकसान का आकलन 63.83 लाख रुपये किया।
इसके साथ ही अंतिम संस्कार, संपत्ति के नुकसान और परिजनों के साहचर्य की हानि (कंसोर्टियम) की मद में अतिरिक्त राशि जोड़ते हुए कुल मुआवजा राशि 66.89 लाख रुपये निर्धारित की गई। न्यायाधिकरण ने इस रकम को परिवार के पांचों सदस्यों के बीच विभाजित करने का निर्देश दिया, जिसमें से आंशिक राशि तुरंत जारी की जाएगी और बाकी बची धनराशि फिक्स्ड डिपॉजिट (सावधि जमा) खातों में रखी जाएगी।
परमिट उल्लंघन और वसूली का अधिकार
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण ने यह तथ्य भी दर्ज किया कि दुर्घटना के समय संबंधित ट्रक बिना वैध परमिट के सड़क पर चल रहा था। इस गंभीर उल्लंघन को देखते हुए अदालत ने बीमा कंपनी को अधिकार दिया कि वह पीड़ित परिवार को पूरा मुआवजा चुकाने के बाद यह समूची रकम ट्रक के मालिक और चालक से वसूल कर सकती है।

