देशव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, याचिकाकर्ता ने वापस ली अर्जी

सुप्रीम कोर्ट ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए किशोरियों के वास्ते चलाए जा रहे केंद्र सरकार के राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत के कड़े रुख के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली, जिसके बाद अदालत ने इसे खारिज कर दिया।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिका की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यह याचिका किसी दुर्भावनापूर्ण इरादे से दाखिल की गई लगती है और इसमें ईमानदारी का अभाव है।

पीठ ने याचिकाकर्ता को चेतावनी देते हुए पूछा कि क्या वे याचिका वापस लेना चाहते हैं या अदालत से कोई तल्ख टिप्पणी सुनना चाहते हैं। पीठ ने दो टूक कहा कि अदालत को कठोर टिप्पणियां करने के लिए मजबूर न किया जाए। यदि याचिकाकर्ता संगठन में डॉक्टर शामिल हैं, तो यह और भी गंभीर मामला बन जाता है। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि यह देश की लाखों बेटियों के स्वास्थ्य से जुड़ा मसला है और याचिकाकर्ता इसे पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं। गलत तरीके से टीकाकरण के सवाल पर पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में मुआवजे के सामान्य नियम लागू होंगे।

निगरानी और मुआवजे पर याचिकाकर्ता की दलील

यह याचिका ‘यूनिवर्सल हेल्थ ऑर्गनाइजेशन’ की ओर से दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि सरकारी स्तर पर चलाए जा रहे इस अभियान में शारीरिक स्वायत्तता, सूचित सहमति, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।

READ ALSO  पति द्वारा लगातार निगरानी और निराधार संदेह तलाक का आधार है: केरल हाईकोर्ट

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि उनका रुख किसी भी तरह से टीका-विरोधी नहीं है और न ही वे एचपीवी वैक्सीन पर सवाल उठा रहे हैं। वकील ने कहा कि उनका मुख्य विरोध इस अभियान को लागू करने के तौर-तरीकों को लेकर है। उन्होंने दलील दी कि टीकाकरण के बाद होने वाले किसी भी प्रतिकूल प्रभाव की निगरानी के लिए कोई स्पष्ट तंत्र नहीं है और इसके शिकार होने वालों के लिए उचित मुआवजा योजना बनाई जानी चाहिए। हालांकि, पीठ द्वारा याचिका पर आगे विचार करने से साफ इनकार किए जाने पर वकील ने इसे वापस लेने का फैसला किया।

28 फरवरी को शुरू हुआ था अभियान

READ ALSO  Supreme Court Sets Aside Suspension of Sentence in Murder Case, Reiterates Strict Standard for Bail Under Section 302 IPC

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 फरवरी को राजस्थान के अजमेर से 14 वर्ष की किशोरियों के लिए इस देशव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान की शुरुआत की थी।

इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत ‘गार्डासिल 4’ वैक्सीन की एकल खुराक दी जा रही है। यह क्वाड्रिवेलेंट टीका सर्वाइकल कैंसर के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार एचपीवी टाइप 16 और 18 के साथ-साथ टाइप 6 और 11 से भी सुरक्षा प्रदान करता है।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क हादसों को रोकने के लिए पैन-इंडिया दिशानिर्देशों पर किया विचार, अवैध ढाबों को बताया बड़ा कारण
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles