ATM से निकासी का ट्रांजैक्शन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में ‘सफल’ दर्ज होना अपने आप में यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि ग्राहक को वास्तव में नकदी मिल गई थी। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-VIII (सेंट्रल), दिल्ली ने यह कहते हुए पंजाब एंड सिंध बैंक को एक ग्राहक के खाते से कटे ₹10,000 वापस करने और देरी के लिए ₹29,600 का वैधानिक मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
आयोग की प्रेसिडेंट दिव्या ज्योति जयपुरियार और मेंबर डॉ. रश्मि बंसल की बेंच ने बैंक को मानसिक पीड़ा और मुकदमे के खर्च के लिए भी कुल ₹20,000 देने का आदेश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
शिकायतकर्ता जितेंद्र सिंह का पंजाब एंड सिंध बैंक की गाजियाबाद स्थित जावली शाखा में सेविंग अकाउंट था। 5 दिसंबर 2022 को दोपहर करीब 2:16 बजे उन्होंने दिल्ली में एक्सिस बैंक के ATM से अपने डेबिट कार्ड के जरिए ₹10,000 निकालने का प्रयास किया।
उनके खाते से ₹10,000 कट गए और ट्रांजैक्शन की पुष्टि का SMS भी मिला, लेकिन ATM से नकदी नहीं निकली। इसके तुरंत बाद सिंह के साथ मौजूद उनके एक सहकर्मी ने उसी ATM से सफलतापूर्वक ₹20,000 निकाले।
सिंह ने 7 दिसंबर 2022 को पंजाब एंड सिंध बैंक से संपर्क किया और बाद में 19 दिसंबर को लिखित शिकायत दी। बैंक ने यह कहते हुए रिफंड से इनकार कर दिया कि उसके रिकॉर्ड में ट्रांजैक्शन सफल दिख रहा था।
इसके बाद सिंह 5 जनवरी 2023 को फिर बैंक शाखा पहुंचे। उनके खाते से अतिरिक्त जांच के लिए ₹590 काटे गए और उन्हें बताया गया कि 45 दिनों के भीतर मामला सुलझा दिया जाएगा। कोई समाधान नहीं मिलने पर उन्होंने बैंक के प्रिंसिपल नोडल ऑफिसर के समक्ष मामला उठाया और बाद में 14 जुलाई 2023 को कानूनी नोटिस भेजा। राहत नहीं मिलने पर उन्होंने सेवा में कमी और लापरवाही का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग का रुख किया।
बैंक ने क्या कहा?
पंजाब एंड सिंध बैंक ने शिकायत का विरोध करते हुए कहा कि मामला लिमिटेशन से बाधित है, इसमें कोई वैध कारण-ए-कार्रवाई नहीं है, शिकायत का मूल्यांकन सही तरीके से नहीं किया गया और शिकायतकर्ता साफ नीयत से आयोग के समक्ष नहीं आया।
बैंक के अनुसार, विवाद को उसके ATM पोर्टल पर दर्ज कर एक्सिस बैंक के पास भेजा गया था, लेकिन एक्सिस बैंक ने ट्रांजैक्शन को सफल बताते हुए दावा खारिज कर दिया।
बैंक ने कहा कि ₹590 जांच शुल्क जमा होने के बाद 9 जनवरी 2023 को मामला ATM सेल/आर्बिट्रेशन के पास भेजा गया था और इसके निपटारे के लिए 45 दिनों का समय निर्धारित था। हालांकि, एक्सिस बैंक ने दोबारा ट्रांजैक्शन को सफल बताते हुए शिकायत अस्वीकार कर दी।
पंजाब एंड सिंध बैंक ने दावा किया कि उसने RBI के दिशानिर्देशों का पालन किया और अपने अधिकार क्षेत्र में आवश्यक जांच भी कराई, इसलिए उसकी ओर से सेवा में कोई कमी नहीं हुई।
विपक्षी पक्ष संख्या 2 और 3 न तो आयोग के सामने पेश हुए और न ही उन्होंने लिखित जवाब दाखिल किया। विपक्षी पक्ष संख्या 4 को 29 फरवरी 2024 को कार्यवाही से हटा दिया गया। वहीं, पंजाब एंड सिंध बैंक निर्धारित समय के भीतर साक्ष्य पेश नहीं कर सका, जिसके बाद आयोग ने 2 जनवरी 2025 को उसका साक्ष्य दाखिल करने का अवसर बंद कर दिया।
सिर्फ बैंक का दावा पर्याप्त नहीं: आयोग
आयोग ने कहा कि लिखित जवाब में किए गए दावे केवल तथ्यात्मक कथन होते हैं। स्वीकार्य और सहायक साक्ष्य के अभाव में ऐसे दावे शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए दस्तावेजी साक्ष्यों को निष्प्रभावी नहीं कर सकते।
आयोग ने RBI के 27 मई 2011 के सर्कुलर और 20 सितंबर 2019 के फेल्ड ट्रांजैक्शन से जुड़े टर्न अराउंड टाइम और ग्राहक मुआवजा संबंधी सर्कुलर का भी उल्लेख किया।
इन दिशानिर्देशों के तहत कार्ड जारी करने वाले बैंक को फेल ATM ट्रांजैक्शन की राशि T+5 कैलेंडर दिनों के भीतर स्वतः वापस करनी होती है। ऐसा नहीं करने पर खाताधारक को ₹100 प्रतिदिन की दर से देरी का मुआवजा देना होता है।
बैंक की ओर से सिस्टम में ट्रांजैक्शन को ‘सफल’ दिखाए जाने पर भरोसा करने की दलील को खारिज करते हुए आयोग ने कहा:
“इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में किसी ट्रांजैक्शन का केवल ‘सफल’ दर्ज होना अपने आप में निर्णायक रूप से यह साबित नहीं करता कि ग्राहक को वास्तव में नकदी मिल गई थी। फेल ATM ट्रांजैक्शन में महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या रकम वास्तव में निकली थी। RBI का फ्रेमवर्क स्वयं उन मामलों की अलग श्रेणी को मान्यता देता है, जिनमें ग्राहक के खाते से रकम कट जाती है लेकिन नकदी नहीं निकलती।”
ATM जर्नल, CCTV या कैश बैलेंसिंग रिपोर्ट पेश नहीं की गई
आयोग ने पाया कि बैंकों की ओर से ऐसा कोई ठोस तकनीकी रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया जिससे यह साबित हो कि विवादित ट्रांजैक्शन में ₹10,000 वास्तव में ATM से निकले थे।
बेंच ने कहा:
“विपक्षी पक्षों ने यह साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं रखा कि शिकायतकर्ता को वास्तव में ₹10,000 की नकदी दी गई थी। कोई ATM जर्नल, कैश बैलेंसिंग रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक जर्नल, CCTV फुटेज, स्विच-लेवल रिकंसिलिएशन रिपोर्ट या अन्य विश्वसनीय तकनीकी रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया जिससे यह साबित हो सके कि विवादित ट्रांजैक्शन से संबंधित नकदी वास्तव में निकली थी।”
आयोग ने इस बात को भी महत्वपूर्ण माना कि शिकायतकर्ता से अतिरिक्त जांच के लिए ₹590 लिए जाने के बावजूद ऐसी कोई जांच रिपोर्ट पेश नहीं की गई जिससे जांच का परिणाम सामने आता हो।
आयोग ने कहा कि बैंक ने केवल इस तथ्य पर भरोसा किया कि ट्रांजैक्शन को ‘सफल’ बताया गया था। मूल तकनीकी या रिकंसिलिएशन रिकॉर्ड के बिना ऐसा दावा यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता कि नकदी वास्तव में निकल गई थी।
ATM किस बैंक का था, इससे ग्राहक का अधिकार प्रभावित नहीं होगा
ATM संचालित करने वाले बैंक पर जिम्मेदारी डालने की दलील पर आयोग ने स्पष्ट किया कि RBI के दिशानिर्देशों के तहत ग्राहक के प्रति प्राथमिक जिम्मेदारी कार्ड जारी करने वाले बैंक की है।
आयोग ने कहा:
“कार्ड जारी करने वाले और ATM संचालित करने वाले बैंकों के बीच का विवाद शिकायतकर्ता के पैसे को तुरंत दोबारा खाते में जमा किए जाने के अधिकार को प्रभावित नहीं कर सकता। RBI फ्रेमवर्क देरी से राशि वापस करने पर मुआवजे की जिम्मेदारी कार्ड जारी करने वाले बैंक पर डालता है।”
आयोग ने स्पष्ट किया कि कार्ड जारी करने वाला बैंक अंतर-बैंक व्यवस्था के तहत ATM संचालित करने वाले बैंक से रकम या मुआवजे की वसूली कर सकता है, यदि देरी के लिए वह जिम्मेदार हो। लेकिन बैंकों के बीच की इस जिम्मेदारी का बोझ ग्राहक पर नहीं डाला जा सकता।
296 दिन की देरी के लिए ₹29,600 मुआवजा
शिकायतकर्ता ने 19 दिसंबर 2022 को बैंक को औपचारिक रूप से शिकायत दी थी। आयोग के अनुसार, T+5 की निर्धारित अवधि 24 दिसंबर 2022 को समाप्त हो गई थी।
24 दिसंबर 2022 से 16 अक्टूबर 2023 को उपभोक्ता शिकायत दाखिल होने तक कुल 296 दिनों की देरी हुई। इस आधार पर RBI के नियमों के तहत ₹100 प्रतिदिन की दर से शिकायतकर्ता को ₹29,600 का मुआवजा देने का आदेश दिया गया।
आयोग का आदेश
आयोग ने पंजाब एंड सिंध बैंक के खिलाफ शिकायत स्वीकार करते हुए बैंक को निर्देश दिया कि वह फेल ATM ट्रांजैक्शन में शिकायतकर्ता के खाते से कटे ₹10,000 वापस करे।
इसके अलावा बैंक को देरी से रकम वापस करने के लिए RBI के नियमों के तहत ₹29,600 का मुआवजा, मानसिक पीड़ा, परेशानी और असुविधा के लिए ₹10,000 तथा मुकदमे के खर्च के रूप में ₹10,000 देने का आदेश दिया गया।
आयोग ने बैंक को आदेश मिलने के 45 दिनों के भीतर इन निर्देशों का पालन करने को कहा। ऐसा नहीं करने पर पूरी बकाया राशि पर डिफॉल्ट की तारीख से भुगतान होने तक 9 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब एंड सिंध बैंक और एक्सिस बैंक के बीच किसी भी अंतर-बैंक विवाद या रिकवरी का निपटारा RBI के लागू ATM नेटवर्क मैकेनिज्म के तहत किया जा सकता है, लेकिन इसका असर उपभोक्ता के अधिकारों पर नहीं पड़ना चाहिए।
केस टाइटल: जितेंद्र सिंह बनाम द पंजाब एंड सिंध बैंक एवं अन्य
केस नंबर: कंज्यूमर कंप्लेंट नंबर DC/77/CC/153/2023

