कोलकाता साइनबोर्ड विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस को हाईकोर्ट जाने को कहा, याचिका निपटाई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को निर्देश दिया कि वह दक्षिण कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित पार्टी दफ्तर से साइनबोर्ड हटाए जाने से जुड़े अपने सभी पक्ष कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष रखे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने टीएमसी की याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह सभी पक्षों की दलीलों पर तेजी से फैसला करे।

शीर्ष अदालत ने सभी पक्षों को अपनी बात हाईकोर्ट के समक्ष रखने की पूरी छूट दी है।

हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश न देने के खिलाफ थी याचिका

टीएमसी ने कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम राहत देने से इनकार करने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। टीएमसी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था। यह मामला पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी के दफ्तर वाले परिसर से होर्डिंग हटाए जाने से संबंधित था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए मामले को वापस हाईकोर्ट के विचाराधीन छोड़ दिया।

निगम की कार्रवाई और हाईकोर्ट का रुख

पूरा विवाद दक्षिण कोलकाता के 9, कैमक स्ट्रीट स्थित परिसर से कथित तौर पर अनधिकृत साइनबोर्ड को हटाए जाने को लेकर है। कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने पुलिस की मदद से टीएमसी के प्रतीक चिन्ह वाले इस बोर्ड को वहां से हटा दिया था।

इससे पहले 28 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट ने नगर निगम की कार्रवाई को चुनौती देने वाली तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट के जस्टिस राजा बसु चौधरी ने कहा था कि चूंकि नगर निगम द्वारा साइनबोर्ड को पहले ही हटाया जा चुका है, इसलिए वर्तमान में इस मुद्दे पर कोई अंतरिम संरक्षण देने की गुंजाइश नहीं बचती है।

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