ठाणे डॉक्टर मारपीट मामला: शिवसेना पार्षद की जमानत के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

ठाणे के एक अस्पताल में डॉक्टरों से कथित मारपीट के मामले में आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सोमवार को म्हात्रे को नोटिस जारी कर तीन हफ्तों के भीतर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़े शब्दों में टिप्पणी करते हुए कहा, “ऐसे लोग सड़कों पर घूमने के हकदार नहीं हैं। हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। कल पालघर में भी इसी तरह की घटना सामने आई, जहां इसी समूह ने फिर से डॉक्टरों पर हमला किया। समाज में एक स्पष्ट संदेश जाना चाहिए और यह दूसरों के लिए एक कड़ा सबक बनना चाहिए।” कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) के पार्षद म्हात्रे ने भी बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा जमानत पर लगाई गई शर्तों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे बाद में अदालत ने उन्हें वापस लेने की अनुमति दे दी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि ट्रायल कोर्ट द्वारा म्हात्रे को दी गई जमानत पर स्वत: संज्ञान लेकर रोक लगाने का हाईकोर्ट का फैसला पूरी तरह उचित था और डॉक्टरों पर हमला करने वाले जमानत के हकदार नहीं हैं।

विवाद की शुरुआत और निचली अदालत का फैसला

यह विवाद 6 जुलाई को उस समय शुरू हुआ था, जब शास्त्री नगर अस्पताल में एक गर्भवती महिला मरीज के इलाज में कथित देरी को लेकर परिजनों और अस्पताल कर्मियों के बीच बहस हुई। इसके बाद म्हात्रे और अन्य आरोपी अस्पताल परिसर में एकत्र हुए और डॉक्टरों के साथ कथित रूप से मारपीट की। इस घटना के बाद स्वास्थ्यकर्मियों और आम जनता के बीच भारी आक्रोश फैल गया था।

घटना के बाद ठाणे की अदालत ने 14 जुलाई को म्हात्रे को जमानत दे दी थी। हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने 18 जुलाई को निचली अदालत के आदेश को विकृत करार देते हुए उस पर रोक लगा दी और म्हात्रे को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट से जमानत और लगाई गई कड़ी शर्तें

इसके बाद 7 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट ने म्हात्रे और तीन अन्य आरोपियों को राहत देते हुए उनकी जमानत मंजूर की थी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई फास्ट-ट्रैक अदालत में तय समयसीमा के भीतर पूरी करने का आदेश दिया था।

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हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए बेहद सख्त शर्तें लागू की थीं। आदेश के अनुसार, जब तक इस मामले में पुलिस जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल नहीं कर देती, तब तक सभी आरोपियों को महाराष्ट्र से बाहर रहना अनिवार्य किया गया था।

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