मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को डीएमके अध्यक्ष एम. के. स्टालिन की उस याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र से टीवीके उम्मीदवार वी. एस. बाबू के निर्वाचन को रद्द करने और स्वयं को वहां से विजयी घोषित करने की मांग की थी। यह मामला अप्रैल 2026 में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से जुड़ा है।
चीफ जस्टिस एस. ए. धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की फर्स्ट बेंच ने अपने फैसले में कहा कि यह रिट याचिका सीधे तौर पर कोलाथुर से बाबू के चुनाव को चुनौती देती है। ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 329 (बी) और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 80 के कानूनी प्रावधानों के तहत इस रिट याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता।
संवैधानिक प्रावधानों के तहत रिट याचिका पर रोक
बेंच ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के पास कानूनी उपचार का एकमात्र रास्ता सक्षम फोरम के समक्ष विधिवत चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटीशन) दाखिल करने का है। अदालत ने कहा कि ‘जांच और सत्यापन प्रक्रिया’ सहित तमाम आपत्तियों को चुनाव याचिका में ही उठाया जा सकता है, बशर्ते याचिकाकर्ता यह साबित करे कि नियमों के कथित उल्लंघन से चुनाव परिणाम पर सीधा और भौतिक प्रभाव पड़ा है।
संविधान का अनुच्छेद 329 (बी) यह स्पष्ट करता है कि संसद या किसी राज्य विधानमंडल के चुनाव को केवल कानून द्वारा निर्धारित प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत चुनाव याचिका के जरिए ही चुनौती दी जा सकती है। इसी सिद्धांत को दोहराते हुए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 80 भी किसी भी चुनाव को केवल इलेक्शन पिटीशन के माध्यम से ही चुनौती देने की अनिवार्यता तय करती है।
ईवीएम और वीवीपैट से जुड़े मुद्दे उचित फोरम में उठाने की छूट
चूंकि रिट याचिका को शुरुआती स्तर पर ही विचार योग्य नहीं पाया गया, इसलिए हाईकोर्ट ने जांच और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों के गुण-दोषों की समीक्षा करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही, अदालत ने 5 अगस्त 2026 के उस प्रशासनिक आदेश की वैधता पर भी कोई राय व्यक्त नहीं की, जिसके तहत चुनाव परिणाम के बाद की जांच और सत्यापन प्रक्रिया को सफल प्रमाणित किया गया था।
बेंच ने साफ किया कि नियमों के कथित उल्लंघन और वीवीपैट (VVPAT) मशीनों में खराबी से जुड़े तमाम तर्कों को संबंधित उचित फोरम के समक्ष उठाने का विकल्प याचिकाकर्ता के लिए पूरी तरह खुला है।
अप्रैल 2026 के चुनाव में मिली थी शिकस्त
यह पूरा कानूनी विवाद अप्रैल 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से उपजा है, जिसमें टीवीके नेता वी. एस. बाबू ने कोलाथुर सीट से तीन बार के विधायक रहे एम. के. स्टालिन को 8,500 से अधिक मतों के अंतर से शिकस्त दी थी।
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद स्टालिन ने चुनाव आयोग का रुख किया था। उनकी अर्जी पर जुलाई में कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में इस्तेमाल की गई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की ‘जांच और सत्यापन’ प्रक्रिया आयोजित की गई थी, जिसके प्रमाणीकरण को बाद में हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

