दिल्ली के एक होटल में ठहरे 70 वर्षीय बुजुर्ग अतिथि के बाथरूम में फिसलकर चोटिल होने के मामले में चंडीगढ़ स्थित जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने होटल प्रबंधन और उसकी सहयोगी सेवा कंपनी को 32,899 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि अतिथियों के लिए परिसर को सुरक्षित स्थिति में बनाए रखने में होटल विफल रहा, जो सीधे तौर पर सेवा में कमी का मामला है।
अध्यक्ष पवनजीत सिंह और सदस्य बृज मोहन शर्मा की दो सदस्यीय पीठ ने होटल प्रबंधन के पेश न होने पर यह फैसला एकतरफा (एक्स-पार्टे) सुनाया।
एसी डक्ट से रिसाव और फिसलन बना हादसे का कारण
शिकायत के अनुसार, पीड़ित बुजुर्ग वर्ष 2019 से संबंधित होटल समूह के डाइनिंग क्लब के प्लेटिनम सदस्य रहे हैं। इसी सदस्यता के तहत उन्हें दिल्ली स्थित होटल में एक रात का मानार्थ (कॉम्प्लिमेंट्री) स्टे मिला था।
ठहराव के दौरान जब वह कमरे के बाथरूम में गए, तो फर्श पर फैले साबुन के झाग और पानी की वजह से उनका पैर बुरी तरह फिसल गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि यह पानी एयर-कंडीशनिंग (एसी) डक्ट से रिसकर फर्श पर जमा हुआ था। गिरने के कारण उनकी पीठ के निचले हिस्से में गंभीर चोट आई और तेज दर्द के चलते वह खड़े होने में असमर्थ हो गए। स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें घिसटते हुए बाथरूम से बाहर आकर रूम सर्विस को फोन करना पड़ा। इसके बाद होटल के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर तौलियों की मदद से फर्श पर फैले पानी और झाग को साफ किया।
महीनों चला इलाज और फिजियोथेरेपी
हादसे के तुरंत बाद होटल के इन-हाउस डॉक्टर ने घायल अतिथि की जांच की, प्राथमिक दवाएं दीं और आगे के इलाज के लिए अस्पताल जाने का परामर्श दिया। दिल्ली से लौटने के बाद पीड़ित को कई महीनों तक अस्पतालों के चक्कर काटने पड़े, विभिन्न जांचें करानी पड़ीं और पीठ के असहनीय दर्द से राहत के लिए लगातार फिजियोथेरेपी सत्रों से गुजरना पड़ा।
उपभोक्ता आयोग के समक्ष उन्होंने गीले बाथरूम की तस्वीरें, डॉक्टरों के पर्चे, जांच रिपोर्ट और फिजियोथेरेपी के बिल पेश करते हुए इलाज पर खर्च हुए 28,899 रुपये की प्रतिपूर्ति के साथ मानसिक प्रताड़ना के हर्जाने की मांग की थी।
आयोग का फैसला और हर्जाने का निर्धारण
आयोग ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि घटना के तुरंत बाद होटल स्टाफ को सूचित करना, इन-हाउस डॉक्टर से प्राथमिक उपचार मिलना और पेश किए गए चिकित्सीय दस्तावेज शिकायतकर्ता के दावे की पुष्टि करते हैं। होटल प्रबंधन या उसकी सहयोगी कंपनी की ओर से आयोग में कोई जवाब या बचाव पेश नहीं किया गया, जिसके चलते आयोग ने शिकायतकर्ता के साक्ष्यों को निर्विवाद माना।
रिकॉर्ड पर मौजूद रसीदों और बिलों की पड़ताल के बाद आयोग ने 25,899 रुपये के चिकित्सा खर्च को वैध पाया। इसके आधार पर आयोग ने विपक्षी पक्षों को चिकित्सा व्यय के रूप में 25,899 रुपये तथा मानसिक प्रताड़ना, उत्पीड़न और कानूनी खर्च के एवज में 7,000 रुपये की एकमुश्त राशि चुकाने का आदेश दिया।

