वडोदरा जमीन विवाद: पूर्व क्रिकेटर युसुफ पठान ने गुजरात हाईकोर्ट से वापस ली याचिका, अदालत ने खारिज किया मामला

गुजरात हाईकोर्ट ने वडोदरा स्थित नगर निगम की जमीन से जुड़े मामले में पूर्व भारतीय क्रिकेटर और लोकसभा सांसद युसुफ पठान की अपील को वापस लेने के आधार पर खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की खंडपीठ ने सोमवार को पठान के वकील के अनुरोध के बाद यह आदेश दिया। 43 वर्षीय पठान ने सिंगल जज के उस पुराने फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें 978 वर्ग मीटर जमीन पर अतिक्रमणकारी करार देते हुए राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा गया था।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील शालिन मेहता ने अदालत को बताया कि उनका मुवक्किल अब इस मामले को अदालत के बाहर प्रशासनिक स्तर पर सुलझाना चाहता है। उन्होंने खंडपीठ को सूचित किया कि राज्य सरकार के एक सर्कुलर के तहत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को जमीन आवंटित करने का नियम है। इसी नीति के तहत वडोदरा नगर निगम (वीएमसी) को आवेदन दिया गया था, लेकिन नगर निगम की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। वकील ने कहा कि मुवक्किल के निर्देशानुसार यदि कोई समाधान होना है, तो वह अदालत के बाहर ही होगा।

प्रशासनिक स्तर पर समाधान तलाशने की तैयारी

यह पूरा मामला वडोदरा नगर निगम के स्वामित्व वाले 978 वर्ग मीटर के भूखंड से जुड़ा है। गुजरात सरकार ने वर्ष 2024 में इस भूखंड के आवंटन को लेकर युसुफ पठान का दावा खारिज कर दिया था। सरकार के इस रुख को सिंगल जज की पीठ ने पिछले साल अगस्त में वैध ठहराया था, जिसके खिलाफ पठान ने खंडपीठ में अपील की थी।

पिछली सुनवाई के दौरान पठान की ओर से अदालत में कहा गया था कि वह राज्य सरकार की खेल नीति के तहत इस जमीन पर अपना दावा आगे बढ़ा रहे हैं। इस पर हाईकोर्ट ने उन्हें चार सप्ताह की मोहलत दी थी। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि जमीन खाली करने में जितनी अधिक देरी होगी, पठान को उतना ही अधिक हर्जाना भुगतना पड़ सकता है।

अवैध कब्जे को लेकर हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार

वर्ष 2024 में दावा खारिज होने के बावजूद पठान ने संबंधित जमीन पर अपना कब्जा बनाए रखा था। उसी वर्ष पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से टीएमसी के टिकट पर सांसद चुने जाने के बाद वडोदरा नगर निगम ने उन्हें जमीन खाली करने का बेदखली नोटिस भेजा था। पठान ने जमीन खाली करने से इनकार कर दिया और मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

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इस मामले में 8 जून को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अनधिकृत कब्जे को लेकर पठान के रुख पर कड़ा एतराज जताया था। अदालत ने मौखिक रूप से सवाल किया था कि बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया को पूरा किए वह इस जमीन पर कैसे काबिज हो गए। अब अपील वापस लिए जाने के बाद हाईकोर्ट में यह कानूनी विवाद समाप्त हो गया है।

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