मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बार एसोसिएशन चुनाव में हार के बाद वकील के ‘सदमे’ को आदेश में किया दर्ज, सुनवाई में नहीं हुए पेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान वकील की गैरमौजूदगी की वजह बार एसोसिएशन चुनाव में मिली हार के बाद हुआ ‘सदमा’ दर्ज की है। कोर्ट ने 19 अगस्त को पारित अपने आदेश में इसका उल्लेख किया।

जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव में हार के कारण लगे सदमे की वजह से बहस करने वाले वकील उस दिन उपलब्ध नहीं थे।

इसके बाद मामले में मौजूद वकीलों ने केस को 20 अगस्त को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया, जिसे कोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज किया।

चुनाव के बाद सुनवाई की वकील ने की थी मांग

इससे पहले हुई सुनवाई में संबंधित वकील ने कोर्ट को बताया था कि वह बार एसोसिएशन का चुनाव लड़ रहे हैं। इसी आधार पर उन्होंने मामले को 17 अगस्त के बाद सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था।

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मध्य प्रदेश बार एसोसिएशन के 2026-28 कार्यकाल के लिए मतदान 17 अगस्त को पूरा हुआ था और चुनाव परिणाम 18 अगस्त को घोषित किए गए थे।

इसके अगले दिन 19 अगस्त को जब मामला बेंच के सामने आया तो बहस करने वाले वकील उपलब्ध नहीं थे।

पेंशन स्थायी रूप से रोकने से जुड़ा है मामला

यह मामला एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी की याचिका से जुड़ा है, जिसमें उसकी पेंशन स्थायी रूप से रोकने के प्रशासनिक आदेश को चुनौती दी गई है। सेशन कोर्ट ने 16 सितंबर 2022 को कर्मचारी को एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराया था, जिसके बाद उसकी पेंशन स्थायी रूप से रोक दी गई।

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याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य ने उसे सुनवाई का अवसर दिए बिना पेंशन स्थायी रूप से बंद कर दी, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने पेंशन रोकने वाले आदेश के अमल पर रोक लगा दी थी। कोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि राज्य की कार्रवाई पेंशन नियमों और संवैधानिक प्रक्रियागत निष्पक्षता की आवश्यकताओं के अनुरूप है या नहीं।

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