दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को निर्देश दिया है कि वह मेट्रो स्टेशनों पर स्तनपान (बेबी फीडिंग) और शिशु देखभाल कक्ष स्थापित करने की मांग पर विचार करे। कोर्ट ने कहा कि यात्रियों के लिए मूलभूत जनसुविधाएं उपलब्ध कराना सीधे उनके स्वास्थ्य और गरिमा से जुड़ा मामला है, इसलिए मेट्रो प्रशासन को इस दिशा में नियमानुसार आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए 12 अगस्त के अपने आदेश में याचिकाकर्ता को DMRC के समक्ष औपचारिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी। अदालत ने मेट्रो अथॉरिटी से कहा कि वह प्राप्त आवेदन का परीक्षण करे और स्टेशनों के स्थापत्य, संरचना या परिचालन को प्रभावित किए बिना संभव कदम उठाए।
पेड एरिया में शौचालय की उपलब्धता पर सवाल
यह कानूनी विवाद मेट्रो परिसरों में सार्वजनिक सुविधाओं की स्थिति को लेकर दायर याचिका से शुरू हुआ था। याचिकाकर्ता की मुख्य चिंता यह थी कि टिकट पंच करके पेड एरिया में प्रवेश करने के बादCommuters के लिए शौचालय की सुविधाएं लगभग पहुंच से बाहर हो जाती हैं।
इससे पहले DMRC ने 8 जुलाई 2025 को एक आरटीआई (RTI) जवाब में कहा था कि सभी मेट्रो स्टेशनों पर शौचालय पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं। मेट्रो प्रशासन के अनुसार, पुरुषों, महिलाओं, दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडरों के लिए अलग-अलग कार्यात्मक शौचालय बने हुए हैं, जो मामूली शुल्क या कुछ चुनिंदा स्टेशनों पर मुफ्त इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हैं। निगम ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वच्छता बनाए रखने के लिए इन परिसरों की दैनिक सफाई और नियमित रखरखाव किया जाता है।
विशिष्ट स्टेशनों की जानकारी देने की छूट
RTI के इस जवाब से असंतुष्ट होकर जनहित याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यद्यपि अनपेड एरिया में सुविधाएं मौजूद हैं, फिर भी यात्रियों को टिकट गेट के अंदर भी प्रसाधन सुविधा की आवश्यकता हो सकती है।
अदालत ने याचिकाकर्ता को यह अवसर दिया कि वह DMRC के सामने उन विशिष्ट स्टेशनों की सूची प्रस्तुत करे, जहां पेड एरिया के भीतर शौचालयों की तत्काल आवश्यकता है। इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया।

