केरल के अलपुझा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कश्मीर यात्रा के दौरान तय सुविधाएं न देने और श्रद्धालुओं को लावारिस छोड़ने के मामले में एक ट्रैवल एजेंसी पर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने एजेंसी और उसके व्यवसायिक भागीदारों को पीड़ित समूह के नेता को 4.98 लाख रुपये का मुआवजा और 3,000 रुपये कानूनी प्रक्रिया का खर्च चुकाने का आदेश दिया है। आयोग ने आदेश का पालन करने के लिए 60 दिनों की समय सीमा तय की है।
यह आदेश आयोग की अध्यक्ष शोली पी. आर. और सदस्य लेखाम्मा सी. के. की पीठ ने 31 जुलाई को सुनाया। आयोग ने कहा कि यात्रियों से पूरा भुगतान लेने के बाद सेवाएं न देना गंभीर लापरवाही है, जिसके लिए एजेंसी और उसके सहयोगी संयुक्त रूप से जिम्मेदार हैं।
रात 11:30 बजे कटरा स्टेशन पर छोड़ा लावारिस
यह विवाद 22 सदस्यीय समूह की भारत यात्रा और धार्मिक स्थलों के भ्रमण से जुड़ा है। समूह के सभी सदस्यों ने यात्रा व्यवस्था के लिए प्रति व्यक्ति 21,000 रुपये अपने टूर लीडर के खाते में जमा कराए थे, जिसे बाद में वाहन, ठहरने और गाइड सुविधाओं के लिए ट्रैवल एजेंसी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया गया था।
शिकायत के मुताबिक, तय कार्यक्रम के अनुसार 22 मार्च 2025 को रात 11:30 बजे जब यह समूह कटरा रेलवे स्टेशन पहुंचा, तो वहां सहायता के लिए एजेंसी का कोई भी प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। यात्रियों ने एजेंसी द्वारा दिए गए फोन नंबरों पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन किसी ने कॉल का उत्तर नहीं दिया।
मजबूरन यात्रियों को स्थानीय परिवहन और अन्य सुविधाओं का प्रबंध अपनी जेब से करना पड़ा। इसके अलावा, एजेंसी का कोई सहयोग न मिलने के कारण श्रद्धालुओं को वैष्णो देवी मंदिर दर्शन के लिए लगभग 15 किलोमीटर पैदल यात्रा करनी पड़ी। इससे यात्रियों को मानसिक और शारीरिक कष्ट के साथ-साथ वित्तीय नुकसान भी झेलना पड़ा।
नोटिस से बचती रही एजेंसी, आयोग ने सुनाया एकतरफा फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान ट्रैवल एजेंसी और उसके भागीदार आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। आयोग ने पाया कि विपरीत पक्षों ने आधिकारिक नोटिस स्वीकार करने से जानबूझकर दूरी बनाई, जिसके बाद उनके खिलाफ एकतरफा (ex-parte) सुनवाई की प्रक्रिया अपनाई गई।
शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता के. ए. ईश्वरीअम्मा ने आयोग के समक्ष ट्रैवल एजेंसी का पंजीकरण प्रमाण पत्र, बैंक लेनदेन के विवरण, यात्रा कार्यक्रम की प्रति और एजेंसी द्वारा जारी किया गया एक चेक पेश किया, जो खाते में ‘अपर्याप्त राशि’ (insufficient funds) होने के कारण बाउंस हो गया था।
प्रस्तुत साक्ष्यों का मूल्यांकन करते हुए आयोग ने माना कि एजेंसी के गैर-जिम्मेदाराना आचरण की वजह से टूर पार्टी को भारी परेशानी हुई। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि भुगतान प्राप्त करने के बाद सेवाएं देने में विफल रहने पर ट्रैवल एजेंसियां ग्राहकों को हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी रहेंगी।

