कावेरी जल विवाद: सुप्रीम कोर्ट का कर्नाटक को CWMA के आदेशों का सख्ती से पालन करने का निर्देश, 24 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच उपजे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम निर्देश जारी किया। शीर्ष अदालत ने कर्नाटक सरकार को स्पष्ट हिदायत दी कि वह कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) द्वारा तमिलनाडु को पानी छोड़ने के संबंध में दिए गए निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करे। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले में जल निकासी की अद्यतन स्थिति समीक्षा के लिए अगली सुनवाई 24 अगस्त तय की है।

अदालत का कड़ा रुख और अगली सुनवाई

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि इस मामले को एक सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध किया जाता है, ताकि पानी छोड़े जाने की अद्यतन रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखी जा सके। पीठ ने कर्नाटक से सवाल किया कि प्राधिकरण के फैसले के अनुसार पानी क्यों नहीं छोड़ा जा रहा है, और साथ ही यह साफ किया कि प्राधिकरण के आदेशों का बिना किसी ढिलाई के पालन होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि कावेरी जल नियमन समिति (CWRC) ने कर्नाटक को 12 अगस्त से अगले 15 दिनों तक रोजाना 12,000 क्यूसेक पानी तमिलनाडु के लिए जारी करने का निर्देश दिया था, जिसे बाद में CWMA ने भी सही ठहराते हुए बरकरार रखा था।

तमिलनाडु का आरोप: पानी रोकने से किसान परेशान

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सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सी.एस. वैद्यनाथन ने अदालत को बताया कि कर्नाटक प्राधिकरण के आदेश का पालन नहीं कर रहा है। इसके कारण तमिलनाडु अपने किसानों को सिंचाई के लिए आवश्यक जल आपूर्ति करने में असमर्थ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक अपने राज्य में खेती के लिए पानी छोड़ रहा है, जबकि उसके जलाशयों में 76 प्रतिशत लाइव स्टोरेज क्षमता होने के बावजूद वह तमिलनाडु का निर्धारित हिस्सा जारी नहीं कर रहा है।

जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का रुख कर कर्नाटक को तुरंत पानी रिलीज करने का निर्देश देने की गुहार लगाई थी।

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कर्नाटक का पक्ष: भीषण संकट के दौर से गुजर रहा बेसिन

दूसरी तरफ, कर्नाटक का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने तमिलनाडु के दावों को खारिज किया और कहा कि अदालत के समक्ष पेश की गई तस्वीर पूरी तरह से भ्रामक है। उन्होंने तर्क दिया कि यह वर्ष कावेरी बेसिन के लिए अत्यधिक जल संकट वाला वर्ष (सिवियर डिस्ट्रेस ईयर) है। ऐसे विपरीत परिस्थितियों में जल वितरण के संतुलन को बनाए रखने के लिए एक तय कानूनी और प्रशासनिक तंत्र कार्य करता है।

दीवान ने कहा कि कावेरी बेसिन में पानी की भारी कमी है और प्राधिकरण इस जमीनी हकीकत से अवगत है। उन्होंने स्वीकार किया कि रोजाना 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ना कर्नाटक के लिए चुनौतीपूर्ण है, फिर भी राज्य प्रशासन ने इस स्तर को बनाए रखने के निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि शुरुआती तीन-चार दिनों में जो प्रवाह कम रहा था, उसकी भरपाई कर्नाटक आने वाले दिनों में कर देगा।

आंकड़ों और दावों का गणित

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तमिलनाडु सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, 3 अगस्त तक कर्नाटक के चार प्रमुख जलाशयों—कृष्णराज सागर (KRS), कबिनी, हरंगी और हेमावती—में कुल मिलाकर 77.537 टीएमसी (थाउजेंड मिलियन क्यूबिक फीट) जल भंडारण मौजूद था। तमिलनाडु का कहना है कि कैचमेंट क्षेत्रों में हुई वर्षा के आधार पर बिलिगुंडलु मापन केंद्र पर उसे 26.954 टीएमसी पानी मिलना चाहिए था, जबकि प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत 4.536 टीएमसी की अंतरिम मात्रा काफी कम है।

तमिलनाडु ने यह भी रिकॉर्ड पर रखा कि इससे पूर्व 28 जुलाई की बैठक में CWRC ने 29 जुलाई से 15 दिनों के लिए 3,500 क्यूसेक पानी प्रतिदिन देने का निर्देश दिया था, लेकिन 29 जुलाई से 2 अगस्त के दौरान बिलिगुंडलु केंद्र पर वास्तविक प्रवाह मात्र 158 से 550 क्यूसेक प्रतिदिन ही दर्ज किया गया।

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