तेलंगाना हाईकोर्ट ने मुफ्त योजनाओं पर जताई चिंता, कहा- अपात्रों को लाभ देने से सरकारी खजाने पर बढ़ता है भारी बोझ

तेलंगाना हाईकोर्ट ने राज्य में मुफ्त कल्याणकारी योजनाओं और अपात्र लोगों को दिए जा रहे सरकारी लाभों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि बिना किसी रोक-टोक के मुफ्त योजनाओं पर भारी खर्च और अपात्र लाभार्थियों को भुगतान जारी रहा, तो एक दिन धन के देवता कुबेर का खजाना भी खाली हो जाएगा।

यह टिप्पणी जस्टिस नागेश भीमापाका ने वित्त विभाग के प्रमुख सचिव संदीप कुमार सुल्तानिया के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान की। अदालत ने कहा कि कर्मचारियों के वेतन भुगतान, कर्ज की अदायगी और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के बाद सरकारी खजाने में राशि काफी कम रह जाती है।

मुफ्त योजनाओं और अपात्र लाभार्थियों पर सवाल

सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि हालांकि कल्याणकारी कार्यक्रम लागू किए जाने चाहिए, लेकिन कई ऐसे लोग भी इनका फायदा उठा रहे हैं जो इसके पात्र नहीं हैं। किसानों के लिए चलाई जा रही ‘रायथू बंधु’ निवेश सहायता योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस योजना का लाभ करोड़पति लोगों को नहीं मिल रहा है? उन्होंने कहा कि इस तरह के व्यापक लाभों से राज्य के खजाने पर अत्यधिक वित्तीय दबाव पड़ता है।

अदालत ने गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) रहने वाले परिवारों के लिए जारी किए गए राशन कार्डों की बड़ी संख्या पर भी ध्यान आकर्षित किया। जज ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में स्थिति ऐसी है कि यदि किसी एक अपात्र लाभार्थी का राशन कार्ड भी रद्द कर दिया जाए, तो उस पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो जाता है।

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सामाजिक सोच और कृषि क्षेत्र में बदलाव

बदलते सामाजिक दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि महात्मा गांधी और स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेरित पुरानी पीढ़ी देश के लिए योगदान देने के लिए उत्सुक रहती थी। इसके विपरीत, आजकल लोगों में यह प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है कि वे सरकार से सीधे व्यक्तिगत लाभ की मांग करते हैं।

इसके अलावा, हाईकोर्ट ने तेलंगाना के ग्रामीण इलाकों में कृषि मजदूरों की कमी का भी मुद्दा उठाया। अदालत ने कहा कि स्थानीय कृषि श्रमिकों की कमी के कारण राज्य के किसानों को बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से आए प्रवासी मजदूरों पर निर्भर होना पड़ रहा है। जज ने स्पष्ट किया कि उनकी इन टिप्पणियों का उद्देश्य सरकार की आलोचना करना या कोई राजनीतिक भाषण देना नहीं है, बल्कि इन प्रशासनिक व वित्तीय विषयों पर गंभीर विचार-विमर्श की आवश्यकता है।

अवमानना मामले की पृष्ठभूमि

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यह मामला सिकंदराबाद कैंटोनमेंट बोर्ड के एक सदस्य द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार ने वर्ष 2024 के उस अदालती निर्देश का पालन नहीं किया, जिसमें बोर्ड को 33 करोड़ रुपये से अधिक के लंबित धन के भुगतान के संबंध में प्रस्तुत अभ्यावेदन पर विचार करने का आदेश दिया गया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि इस राशि में से 25 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

इससे पहले 10 जुलाई को हाईकोर्ट ने संदीप कुमार सुल्तानिया के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था। राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल न किए जाने और उपस्थिति से छूट का आवेदन न देने पर यह कदम उठाया गया था। कोर्ट ने उस समय सरकारी वकील की अतिरिक्त समय देने की मांग को खारिज कर दिया था।

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शुक्रवार को संदीप कुमार सुल्तानिया व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए। जज ने कहा कि किसी वरिष्ठ अधिकारी को अदालत में बुलाना दुखद है, लेकिन व्यावहारिक परिस्थितियों के कारण ऐसा करना पड़ा। हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 अगस्त की तारीख तय की है।

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