पति-पत्नी के विवाद में सास और रिश्तेदारों पर अस्पष्ट आरोपों के आधार पर केस नहीं चल सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महिला द्वारा अपनी सास और तीन दूर के रिश्तेदारों के खिलाफ दर्ज कराए गए उत्पीड़न और क्रूरता के आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए आरोप बेहद अस्पष्ट और बिना किसी ठोस आधार के थे।

शादी के एक साल के भीतर बिगड़े रिश्ते

जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने 5 अगस्त को इस मामले में अपना आदेश जारी किया। यह मामला 13 मई 2024 को हुई एक शादी से जुड़ा है, जिसके कुछ ही समय बाद दंपति के रिश्तों में खटास आ गई थी। शादी का एक साल पूरा होने से पहले ही मतभेद इतने बढ़ गए कि पत्नी ने 5 अप्रैल 2025 को अपने पति, सास और अन्य परिजनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवा दी।

मुख्य आरोप पति पर, अलग से होगी जांच

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता की मुख्य शिकायतें उसके पति से हैं, जो फिलहाल अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं है। चूंकि पति पुलिस जांच का सामना कर रहा है, इसलिए उसे इन आरोपों का जवाब स्वतंत्र रूप से देना होगा। पीठ ने माना कि अदालत का दरवाजा खटखटाने वाली सास और तीन अन्य रिश्तेदारों के खिलाफ क्रूरता का कोई स्पष्ट कानूनी मामला नहीं बनता है।

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खान-पान और बॉडी शेमिंग के आरोप

महिला की ओर से दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उसका पति उसके हर हफ्ते मायके जाने पर झगड़ा करता था और सास उस विवाद को और बढ़ा देती थी। शिकायत में यह भी कहा गया कि सास उसे ताने देती थी, पति के भोजन करने के बाद ही उसे खाने की अनुमति देती थी और रागी बॉल्स जैसे पौष्टिक व्यंजन केवल अपने बेटे के लिए बनाती थी। इसके अलावा, महिला ने दावा किया कि उसके पति ने उस पर एक खास शैम्पू इस्तेमाल करने और बाल सीधे कराने का दबाव बनाया, जिससे उसके बाल झड़ने लगे। महिला ने यह आरोप भी लगाया कि पति और चाचा ने पारिवारिक चैट ग्रुप में उसके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर झूठी बातें फैलाकर उसे बदनाम किया।

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अदालत में वकीलों की दलीलें

सुनवाई के दौरान सास और रिश्तेदारों का पक्ष रख रहे वकील अंकित एस रेड्डी ने तर्क दिया कि यह वैवाहिक विवाद पूरी तरह पति और पत्नी के बीच का है, और उनके मुवक्किलों का इससे कोई संबंध नहीं है। वहीं, राज्य सरकार की वकील दीप्ति अल्वा ने प्राथमिकी का बचाव करते हुए कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पूरी जांच होना जरूरी है। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता महिला ने भी स्वयं उपस्थित होकर अपनी याचिका के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत किए। हालांकि, आरोपों में स्पष्टता और प्रमाण की कमी को देखते हुए हाईकोर्ट ने सास और तीनों रिश्तेदारों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने का निर्णय लिया।

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