सूरत के नासिरनगर क्षेत्र में 30 मई को हुई डिमोलिशन कार्रवाई के बाद अपने घर को तोड़े जाने की आशंका जताने वाले एक स्थानीय निवासी की याचिका पर गुजरात हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर दी है। सूरत नगर निगम (एसएमसी) द्वारा अदालत में यह आश्वासन दिए जाने के बाद कि फिलहाल संबंधित संपत्ति को ढहाने की कोई योजना नहीं है, हाईकोर्ट ने सोमवार को इस याचिका का निपटारा कर दिया।
नगर निगम ने दिया कानूनी प्रक्रिया के पालन का भरोसा
यह याचिका सूरत निवासी शेख हुसैन अजीज ने अपने वकील ज़मीर शेख के माध्यम से दायर की थी। याचिकाकर्ता ने अदालत में चिंता जताई थी कि नासिरनगर में नगर निगम द्वारा चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान के बाद उनके आवासीय परिसर को भी गिराया जा सकता है।
मामले की सुनवाई के दौरान सूरत नगर निगम की ओर से पेश हुए वकील अनुज त्रिवेदी ने कोर्ट को सूचित किया कि डिमोलिशन ड्राइव से जुड़ा मुख्य विवाद पहले से ही एक अलग याचिका के तहत हाईकोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम की फिलहाल याचिकाकर्ता के मकान को गिराने की कोई मंशा नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि भविष्य में ऐसी कोई कार्रवाई प्रस्तावित होती है, तो याचिकाकर्ता को नियमानुसार पहले नोटिस जारी किया जाएगा और कानून के तहत तय प्रक्रिया का पूरी तरह पालन होगा।
जस्टिस निखिल करियेल ने नगर निगम के इस वक्तव्य को रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिया कि यदि भविष्य में कोई दंडात्मक कदम उठाया जाता है, तो नागरिक निकाय कानून के मुताबिक ही आगे बढ़े। अदालत ने टिप्पणी की कि नगर निगम के आधिकारिक आश्वासन को देखते हुए इस मामले में अब आगे किसी निर्देश की आवश्यकता नहीं रह जाती है।
30 मई की डिमोलिशन ड्राइव और राज्य सरकार की जांच
यह मामला 30 मई को सूरत के नासिरनगर में झुग्गियों को हटाए जाने से जुड़े विवाद से उत्पन्न हुआ है। इस कार्रवाई से प्रभावित 26 निवासियों ने गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया था कि नागरिक निकाय ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए उनके घरों को ध्वस्त कर दिया।
जस्टिस करियेल की पीठ के समक्ष इन याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। पूर्व में हुई सुनवाइयों के दौरान कोर्ट ने इस कार्रवाई की वैधानिकता और अधिकारियों की जवाबदेही पर कड़े सवाल उठाए थे, जिसके बाद गुजरात सरकार ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच का आदेश दिया था।

