सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने विवादों के निपटारे की ऑनलाइन प्रक्रियाओं में पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर निर्भर रहने के प्रति आगाह किया है। जयपुर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रमंडल शांति मध्यस्थता सम्मेलन 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन मध्यस्थता का काम मुख्य रूप से प्रशिक्षित मानवीय मध्यस्थों के मार्गदर्शन में ही होना चाहिए। सीजेआई ने कहा कि एआई सॉफ्टवेयर इंसानी आवाज की नकल तो कर सकता है, लेकिन वह किसी भी स्थिति में मानवीय संवेदना और दिल से मांगी जाने वाली माफी की भावना को नहीं दर्शा सकता।
विवाद समाधान में अदालतों का पूरक है मध्यस्थता
सीजेआई सूर्य कांत ने कहा कि मध्यस्थता (मीडियाशन) को अब मुकदमों की तुलना में कमतर या subordinate नहीं माना जाना चाहिए। मीडियाशन एक्ट के जरिए मिले कानूनी आधार के कारण अब मध्यस्थता को न्याय प्रणाली में अदालतों के बराबर का स्थान मिला है। उन्होंने रेखांकित किया कि अदालतें और मध्यस्थता प्रक्रियाएं एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि पूरक हैं। जहां अदालतें कानूनी निश्चितता, मिसालें और अंतिम फैसला देती हैं, वहीं मध्यस्थता पक्षों को अंतिम निर्णय से पहले अपनी सहमति से समाधान गढ़ने का अवसर प्रदान करती है।
कानून और शांति के संबंध पर बात करते हुए सीजेआई ने कहा कि शांति कानून की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि यह कानून की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मध्यस्थता कोई आसान काम नहीं है, बल्कि यह विधिक क्षेत्र के सबसे कठिन कौशलों में शामिल है, जिसे निरंतर अनुभव और कठोर प्रशिक्षण के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है।
पारंपरिक पंचायत व्यवस्था और रिश्तों का स्थायित्व
हरियाणा के अपने ग्रामीण जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) जैसी शब्दावली आने से बहुत पहले भारत के गांवों में सामुदायिक संवाद से मामले सुलझाए जाते थे। उन्होंने कहा कि दो परिवारों के बीच झगड़ा होने पर गांव के बुजुर्ग पेड़ के नीचे बैठकर बातचीत से हल निकालते थे, जिसे पंचायत कहा जाता था।
सीजेआई के अनुसार, शांति स्थापित करने की सच्ची परीक्षा केवल कागजी समझौतों पर हस्ताक्षर होना नहीं है, बल्कि यह देखना है कि क्या विवाद समाप्त होने के बाद भी सामाजिक और व्यक्तिगत संबंध बने रहते हैं। विवाद समाधान की असली सफलता इसी में निहित है कि क्या अगले दिन दोनों पक्ष आपस में बैठकर सामान्य ढंग से बातचीत कर सकते हैं।
जयपुर घोषणापत्र और 52 देशों की भागीदारी
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (आरएसएलएसए) द्वारा आयोजित यह तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन 2 अगस्त तक चलेगा। इसमें 52 राष्ट्रमंडल देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान व्यावसायिक, पारिवारिक, कार्यस्थल, बुनियादी ढांचे, पर्यावरण, जलवायु और आपराधिक न्याय जैसे क्षेत्रों में मध्यस्थता की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की जा रही है। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ‘जयपुर घोषणापत्र’ तैयार करना है, जो दुनिया भर के कानूनी विशेषज्ञों और मध्यस्थों के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक का काम करेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस. पी. शर्मा ने कहा कि मध्यस्थता सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने और न्यायिक संस्थाओं में आम जनता का विश्वास गहरा करने का एक मजबूत जरिया है। इस उद्घाटन सत्र में केंद्रीय कानून राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और जाम्बिया के सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश आभा नायर पटेल सहित कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित थीं।

