गर्भावस्था के आधार पर सरकारी नौकरी देने से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि गर्भावस्था के आधार पर किसी महिला को सरकारी नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी महिला को मातृत्व और रोजगार में से किसी एक को चुनने के लिए विवश करना उसके आजीविका के अधिकार और प्रजनन अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला अभ्यर्थी कोमल जायसवाल की विशेष अपील पर सुनाया। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें नौ महीने की गर्भवती महिला की शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) टालने की अर्जी अस्वीकार कर दी गई थी। इसके साथ ही अदालत ने एकल पीठ के पुराने आदेश को रद्द करते हुए चयन आयोग को चार सप्ताह के भीतर महिला की शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया है।

आयोग और एकल पीठ का फैसला रद्द

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यह विवाद साल 2023 की वन रक्षक एवं वन्य जीव रक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। लिखित परीक्षा पास करने के बाद कोमल जायसवाल को फरवरी 2026 में 14 किलोमीटर की पैदल शारीरिक परीक्षा में शामिल होना था। उस समय नौ महीने की गर्भवती होने के कारण उन्होंने प्रसव के बाद परीक्षा कराने का अनुरोध किया था। हालांकि, भर्ती नियमों में स्थगन का स्पष्ट प्रावधान न होने की बात कहकर आयोग ने उनका आवेदन खारिज कर दिया था। इसके बाद दायर याचिका को एकल पीठ ने भी खारिज कर दिया था, जिसे अब दो जजों की खंडपीठ ने पलट दिया है।

संवेदनशील और मानवीय रवैया अपनाने की जरूरत

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22 जुलाई को पारित और गुरुवार को जारी अपने आदेश में खंडपीठ ने कहा कि वैवाहिक स्थिति या गर्भावस्था को सरकारी सेवा के लिए अयोग्यता नहीं माना जा सकता। अदालत ने रेखांकित किया कि जब नियमों में परीक्षा स्थगित करने पर कोई सीधी रोक नहीं थी, तब आयोग को ऐसे विशेष मामलों में संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए था।

पीठ ने यह भी ध्यान दिलाया कि विज्ञापन जारी होने और लिखित परीक्षा के बीच दो साल से अधिक का समय बीता, जिस दौरान विवाह और बच्चे का जन्म स्वाभाविक जीवन घटनाएं हैं। ऐसी परिस्थितियों के लिए महिलाओं को दंडित करना समानता और निष्पक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ है।

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पद सुरक्षित रखने और परिणामी लाभ देने का निर्देश

मामले का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने चयन आयोग को निर्देश दिया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) महिला श्रेणी में एक पद तब तक सुरक्षित रखा जाए जब तक कि मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।

अदालत ने आदेश दिया कि यदि कोमल जायसवाल आगामी शारीरिक दक्षता परीक्षा, मेडिकल जांच और मेधा सूची में सफल होती हैं, तो सरकार उन्हें सभी परिणामी लाभों के साथ नियुक्त करे। ये लाभ उसी तिथि से लागू किए जाएंगे, जिस दिन OBC महिला श्रेणी में उनसे कम अंक पाने वाले किसी उम्मीदवार को नियुक्ति दी गई थी।

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