दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिनेता सलमान खान के पर्सनालिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) का उल्लंघन करने के मामले में अंतरिम फैसला सुनाते हुए फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लीगल’ के टीजर, पोस्टर और संबंधित सोशल मीडिया सामग्री को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि 59 वर्षीय बॉलीवुड अभिनेता की पूर्व अनुमति के बिना उनके नाम, हाव-भाव और पहचान से जुड़ी विशिष्ट विशेषताओं का व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता।
27 जुलाई को जारी अपने आदेश में जस्टिस ज्योति सिंह ने फिल्म निर्माताओं को 24 घंटे के भीतर सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया नेटवर्क, ओटीटी, टीवी और प्रिंट मीडिया से विवादित टीजर और प्रचार सामग्री हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि निर्माता निर्धारित समयसीमा में सामग्री नहीं हटाते हैं, तो X, मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक और गूगल एलएलसी जैसी डिजिटल सेवा प्रदाताओं को संबंधित यूआरएल (URLs) को तुरंत ब्लॉक करना होगा।
24 घंटे में कंटेंट हटाने का निर्देश
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि डिजिटल माध्यमों की तेज पहुंच और व्यापक प्रसार को देखते हुए किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन करने वाली सामग्री उसकी प्रतिष्ठा को गहरा नुकसान पहुंचाती है। जस्टिस ज्योति सिंह ने रेखांकित किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता, गरिमा और सम्मान के अधिकार को व्यक्तित्व अधिकार के एक अनिवार्य हिस्से के रूप में मान्यता प्राप्त है।
हाईकोर्ट ने पाया कि फिल्म के टीजर में काला हिरण शिकार मामले से जुड़े लंबित न्यायिक मामलों का संदर्भ दिया गया है और गवाहों को डराने व जांच प्रणाली को प्रभावित करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट के अनुसार, यह पूरी प्रचार रणनीति प्रथम दृष्टया अभिनेता की वर्षों से निर्मित साख और छवि को गंभीर व अपूरणीय क्षति पहुंचाती है।
याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप
सलमान खान द्वारा दायर याचिका के अनुसार, 29 मई को जारी फिल्म के पोस्टर और बाद में जारी किए गए टीजर में एक मुख्य पात्र को उनका ट्रेडमार्क ब्रेसलेट और इयर स्टड्स पहने दिखाया गया है, जो सीधे तौर पर उनकी पहचान से जुड़ा है।
अभिनेता के वकील ने दलील दी कि राजस्थान की एक अदालत द्वारा आर्म्स एक्ट के मामले में सलमान खान को बरी किए जाने के बावजूद पोस्टर में मुख्य किरदार को हाथ में हथियार लिए दिखाया गया है, जो एक भ्रामक और मानहानिकारक संदेश फैलाता है। याचिका में आरोप लगाया गया कि पब्लिसिटी पाने के लिए निर्माताओं ने पात्र का नाम सलमान के नाम से मिलता-जुलता रखा, उन्हें ‘दबंग’ कहकर संबोधित किया और उनका नाम अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों व अंडरवर्ल्ड की साजिशों से जोड़ने का प्रयास किया।
फिल्म निर्माता का पक्ष और पूर्व आदेश
दूसरी ओर, फिल्म निर्माता अमित जानी ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि यह फिल्म सलमान खान की बायोपिक नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी सार्वजनिक हस्ती आपराधिक मामलों, अदालती कार्यवाहियों या ऐतिहासिक घटनाओं पर एकाधिकार का दावा नहीं कर सकती। निर्माताओं ने यह भी बताया कि फिल्म को अभी तक प्रमाणन के लिए सेंसर बोर्ड के पास नहीं भेजा गया है।
इसके जवाब में सलमान खान ने स्पष्ट किया कि वे सार्वजनिक रिकॉर्ड या ऐतिहासिक घटनाओं पर मालिकाना हक का दावा नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपनी विशिष्ट पहचान और व्यक्तिगत विशेषताओं के अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल का विरोध कर रहे हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले 11 दिसंबर 2025 को भी दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश के जरिए विभिन्न ई-कॉमर्स वेबसाइटों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों को बिना अनुमति सलमान खान के नाम, फोटो और पहचान का इस्तेमाल करने से रोका था।

