दिल्ली में वर्ष 2014 में हुए एक दर्दनाक एलपीजी सिलेंडर विस्फोट में अपने माता-पिता और दो छोटे भाई-बहनों को खोने वाले एकमात्र जीवित बचे युवक को 11 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद न्याय मिला है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), उसके गैस वितरक और बीमा कंपनी को पीड़ित को 32 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। आयोग ने स्पष्ट निष्कर्ष निकाला कि गैस रिसाव की शिकायतों को लगातार नजरअंदाज करने और अनिवार्य सुरक्षा जांच न कराने के कारण यह भीषण हादसा हुआ।
पीठ के पीठ अध्यक्ष डॉ. इंदर जीत सिंह और सदस्य शशि नंदक्योलियर ने 21 जुलाई को यह निर्णय 20 वर्षीय अमन कुमार की ओर से दायर उपभोक्ता शिकायत पर सुनाया। अमन जब बच्चे थे, तब इस हादसे में बुरी तरह झुलस गए थे।
लापरवाही और हादसे का पूरा ब्योरा
यह हादसा 4 नवंबर 2014 को दिल्ली स्थित परिवार के किराए के मकान में हुआ था। एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति 20 अक्टूबर 2014 को हुई थी और उसी समय से उसमें से लगातार गैस का रिसाव हो रहा था। शिकायत के अनुसार, परिवार ने तुरंत वितरक कमला करन गैस सर्विस को सूचित कर सिलेंडर की जांच या उसे बदलने का अनुरोध किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
हादसे के दिन सुबह जब अमन की मां पूनम देवी ने गैस की गंध कम करने के लिए दरवाजे खोलने के बाद चूल्हा जलाया, तो पूरे कमरे में आग फैल गई। हादसे में अमन के पिता संजीत मिश्रा की उसी दिन मौत हो गई, जबकि उनकी मां पूनम देवी और दो छोटे भाई-बहन शमी और दीपक अगले कुछ दिनों में दम तोड़ गए। अमन खुद 20 से 25 प्रतिशत तक झुलस गए थे, जिनका इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल और बाद में पीजीआईएमएस, रोहतक में चला।
मुआवजे की राशि और भुगतान की शर्तें
आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को पब्लिक लायबिलिटी पॉलिसी के तहत 20 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। वहीं, गंभीर लापरवाही बरतने के लिए इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन और वितरक कमला करन गैस सर्विस पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कुल 32 लाख रुपये के इस मुआवजे में 2 लाख रुपये मुकदमेबाजी का खर्च भी शामिल है।
इस राशि पर 20 अक्टूबर 2016 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा। यदि संबंधित पक्ष 45 दिनों के भीतर इस राशि का भुगतान करने में विफल रहते हैं, तो ब्याज दर बढ़कर 12 प्रतिशत वार्षिक हो जाएगी।
पीड़ित के भविष्य के लिए वित्तीय प्रावधान
अमन के पुनर्वास और दीर्घकालिक कल्याण को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने निर्देश दिया है कि मुआवजे की राशि में से 20 लाख रुपये तुरंत उन्हें जारी किए जाएं ताकि वे अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा कर सकें।
शेष राशि को सात वर्षों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश किया जाएगा। इस एफडी का तिमाही ब्याज सीधे अमन के बैंक खाते में भेजा जाएगा, जिससे उनकी उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और दैनिक जीवनयापन के खर्च पूरे हो सकें।
विपक्ष के तर्कों को आयोग ने किया खारिज
राष्ट्रीय आयोग ने बीमा कंपनी और तेल कंपनी की ओर से अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए दिए गए सभी तर्कों को खारिज कर दिया। बीमा कंपनी ने हादसे की सूचना लगभग दो साल देरी से दिए जाने के आधार पर दावे को अस्वीकार कर दिया था। हालांकि, आयोग ने कहा कि अमन एक गंभीर रूप से घायल नाबालिग थे जिन्होंने अपने पूरे परिवार को खो दिया था, इसलिए देरी पूरी तरह तर्कसंगत थी। पुलिस पहले ही मामले की जांच कर चुकी थी और सभी रिकॉर्ड मौजूद थे, इसलिए देरी से बीमा कंपनी को कोई नुकसान नहीं हुआ। आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि उसने फरवरी 2023 में बीमा कंपनी को देरी को नजरअंदाज कर दावे पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था, लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया।
आयोग ने परिवार पर लापरवाही के आरोपों को भी खारिज कर दिया। पुलिस को दिए गए पिता के उस बयान को साक्ष्य मानने से इनकार कर दिया गया जो उन्होंने 85 प्रतिशत झुलसी स्थिति में दिया था। इसके बजाय, गैस पासबुक के आधिकारिक रिकॉर्ड से यह साबित हुआ कि 2013 में होने वाली mandatory यानी अनिवार्य सुरक्षा जांच कभी की ही नहीं गई थी।
अपने फैसले में आयोग ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां अपने स्वतंत्र वितरकों की आड़ लेकर खराब उत्पाद या आपूर्ति श्रृंखला की लापरवाही की जिम्मेदारी से नहीं बच सकतीं। उपभोक्ताओं को यह पूरा अधिकार है कि वे एक सुरक्षित एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था की उम्मीद करें।

