उत्तराखंड के हरिद्वार जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि कोई भी कंपनी किसी उत्पाद का इस्तेमाल हो जाने के आधार पर रिफंड या रिप्लेसमेंट देने से इनकार नहीं कर सकती। आयोग ने माना कि जूतों जैसी चीजों में खराबी का पता लगाने के लिए उनका इस्तेमाल करना स्वाभाविक और जरूरी है। जूते फटने के मामले में जूता निर्माता कंपनी ‘रेड चीफ’ को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार आचरण का दोषी ठहराते हुए ग्राहक को नया जूता देने या पूरे पैसे लौटाने का आदेश दिया गया है।
खराबी जांचने के लिए इस्तेमाल जरूरी: आयोग
आयोग की अध्यक्ष रंजना गोयल और सदस्य अमरेश रावत व गगन कुमार गुप्ता की पीठ ने 27 जून को यह फैसला सुनाया। पीठ ने कहा कि जब कोई उपभोक्ता जूते जैसा उत्पाद खरीदता है, तो उसमें कोई कमी है या नहीं, यह जानने के लिए उसका इस्तेमाल करना सामान्य व्यावहारिक समझ की बात है। अगर इस्तेमाल के कुछ ही समय भीतर कोई खराबी सामने आती है, तो कंपनी सिर्फ इस आधार पर रिफंड देने से पीछे नहीं हट सकती कि उत्पाद पहना जा चुका है।
आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि कंपनी ने ऐसा कोई तकनीकी साक्ष्य या विशेषज्ञ राय पेश नहीं की, जिससे यह साबित हो सके कि जूते विनिर्माण दोष (मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट) के बजाय किसी दुर्घटना या खरीदार की लापरवाही से फटे थे।
ऑनलाइन खरीदारी से शुरू हुआ विवाद
यह मामला 26 फरवरी 2025 का है, जब एक उपभोक्ता ने विज्ञापनों से प्रभावित होकर अमेज़न के जरिए 2,009 रुपये में रेड चीफ के जूते ऑर्डर किए थे। 4 मार्च को जूतों की डिलीवरी हुई, लेकिन उपभोक्ता के अनुसार उनकी गुणवत्ता खराब थी और सामान्य इस्तेमाल के एक महीने के भीतर ही जूते फट गए।
ग्राहक ने 6 मार्च 2025 को जब उत्पाद वापस करने का प्रयास किया, तो डिलीवरी एजेंट ने जूते पहने होने का हवाला देकर उन्हें स्वीकार करने से मना कर दिया। इसके बाद ग्राहक ने कंपनी को ईमेल भेजकर पैसे वापस मांगे, लेकिन रेड चीफ ने यह कहते हुए रिफंड खारिज कर दिया कि जूते दुर्घटनावश खराब हुए हैं। कानूनी नोटिस का जवाब न मिलने पर उपभोक्ता ने क्षतिग्रस्त जूतों को भौतिक सबूत के रूप में पेश करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
कंपनी की दलीलें खारिज, क्षतिपूर्ति का निर्देश
आयोग के समक्ष रेड चीफ ने स्वीकार किया कि 25 फरवरी को ऑनलाइन ऑर्डर दिया गया था, लेकिन किसी भी तरह के विनिर्माण दोष से इनकार किया। कंपनी का तर्क था कि वह उच्च गुणवत्ता वाले जूते बनाने के लिए जानी जाती है और ग्राहक ने जूते इस्तेमाल करके रिटर्न नीति का उल्लंघन किया है। साथ ही कंपनी ने आरोप लगाया कि ग्राहक ने शुरुआत में खराब गुणवत्ता की कोई तस्वीर नहीं भेजी।
उपभोक्ता आयोग ने कंपनी के इन तर्कों को खारिज कर दिया। आयोग ने पाया कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि ग्राहक ने गुणवत्ता खराब मिलने पर तुरंत पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। आयोग ने रेड चीफ को 45 दिनों के भीतर 2,009 रुपये की कीमत का नया जूता देने या पूरी राशि रिफंड करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, कंपनी को मानसिक उत्पीड़न के मद में 5,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 2,000 रुपये का भुगतान करने को कहा गया है। तय समय सीमा में भुगतान न करने पर शिकायत दर्ज होने की तारीख से 8 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज देना होगा।

