इलाहाबाद हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज सब-कमेटी ने कानूनी सहायता व्यवस्था की निगरानी के लिए मॉनिटरिंग कमेटी गठित की

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ की हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज सब-कमेटी (HCLSSC) ने कानूनी सहायता सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया है। यह समिति सुप्रीम कोर्ट के शंकर महतो बनाम बिहार राज्य मामले में जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के पालन की निगरानी करेगी। समिति को कानूनी सहायता व्यवस्था की नियमित समीक्षा, समय-सीमा के अनुपालन की निगरानी, प्रदर्शन का मूल्यांकन और शिकायतों के निस्तारण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

यह निर्णय 16 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज सब-कमेटी, लखनऊ के सचिव एवं रजिस्ट्रार (न्यायिक)(स्टेशनरी) भगीरथ वर्मा द्वारा जारी पत्र के माध्यम से सूचित किया गया। पत्र में कहा गया है कि मुख्य न्यायाधीश के 15 मई 2026 के आदेश के अनुपालन में प्रशासनिक समिति ने मॉनिटरिंग कमेटी के गठन और सदस्यों के नामांकन को मंजूरी दी। इसमें 29 मई 2026 के हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी, इलाहाबाद के पत्र का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा 16 अप्रैल 2026 को क्रिमिनल अपील संख्या 1971/2026 (एसएलपी (क्रिमिनल) संख्या 6906/2017 से उत्पन्न), शंकर महतो बनाम बिहार राज्य में जारी आदेश के पैरा 13 के अनुसार SOP के पैरा 8 के तहत मॉनिटरिंग कमेटी गठित करने की आवश्यकता बताई गई थी।

मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य

समिति में निम्नलिखित सदस्यों को नामित किया गया है:

  • श्री अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता
  • श्री चंद्रशेखर पांडेय, अधिवक्ता
  • श्री शिव नाथ तिलहरी, अधिवक्ता
  • श्री अनुराग वर्मा, अधिवक्ता
  • प्रेजेंटिंग ऑफिसर, लीगल सर्विसेज सब-कमेटी, लखनऊ बेंच (पदेन सदस्य)
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तीन वर्ष का होगा कार्यकाल

SOP के अनुसार मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। हालांकि, सदस्य सचिव पदेन (एक्स-ऑफिशियो) सदस्य के रूप में कार्य करेंगे।

समिति की प्रमुख जिम्मेदारियां

समिति को कानूनी सहायता व्यवस्था की निगरानी और सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे गए हैं। इनमें शामिल हैं:

  • प्रत्येक माह कार्यों की प्रगति, विलंब और अनुपालन की समीक्षा करना।
  • निर्धारित समय-सीमा के पालन की निगरानी करना।
  • पैनल अधिवक्ताओं, अनुवादकों और जेल स्टाफ के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना।
  • चूक पाए जाने पर चेतावनी, प्रशिक्षण या पैनल से हटाने जैसी कार्रवाई की सिफारिश करना।
  • प्राप्त शिकायतों की 15 दिनों के भीतर जांच करना।
  • प्रत्येक पखवाड़े कम से कम एक बार भौतिक या वर्चुअल बैठक कर मामलों की प्रगति की समीक्षा करना तथा व्यवस्था की दक्षता बनाए रखने के लिए सदस्य सचिव को आवश्यक सुझाव देना।
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मासिक और वार्षिक रिपोर्ट देना होगा

SOP के अनुसार मॉनिटरिंग कमेटी प्रत्येक माह एक मानकीकृत प्रारूप में राज्य विधिक सेवा समिति (SCLSC) और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) को रिपोर्ट भेजेगी। इसके अतिरिक्त, समिति वर्ष में एक बार समेकित रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसमें कार्यप्रणाली के रुझानों और सुधार संबंधी सिफारिशों का उल्लेख होगा।

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