केरल के एक उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मोटरसाइकिल की मरम्मत में गंभीर लापरवाही बरतने और अनुचित व्यापार व्यवहार के मामले में एक मैकेनिक को दोषी ठहराया है। आयोग ने मैकेनिक को निर्देश दिया है कि वह पीड़ित दिहाड़ी मजदूर को मुआवजे और हर्जाने के रूप में कुल 66,752 रुपये का भुगतान करे। दरअसल, मैकेनिक द्वारा इंजन ठीक किए जाने के महज तीन महीने के भीतर ही मोटरसाइकिल दोबारा खराब हो गई थी, जिसके बाद यह कानूनी कदम उठाया गया।
देरी और पुलिस का हस्तक्षेप
यह मामला जुलाई 2025 में शुरू हुआ था, जब रंजीत आर. नाम के एक व्यक्ति ने अपनी ‘हीरो ग्लैमर’ मोटरसाइकिल के इंजन की खराबी ठीक कराने के लिए मैकेनिक अनिलकुमार बी. की वर्कशॉप से संपर्क किया था। रंजीत ने मरम्मत के काम के लिए अग्रिम भुगतान के रूप में मैकेनिक को 12,000 रुपये दिए थे। हालांकि, मैकेनिक ने तय समय पर गाड़ी वापस नहीं की। रंजीत जब भी वर्कशॉप जाते, उन्हें अपनी मोटरसाइकिल खुली और बिखरी हुई हालत में ही मिलती थी।
रंजीत पेशे से एक दिहाड़ी मजदूर हैं और रोजाना 1,100 रुपये कमाते हैं। वर्कशॉप के बार-बार चक्कर काटने की वजह से उन्हें अपनी आठ दिनों की दिहाड़ी गंवानी पड़ी। आखिरकार परेशान होकर उन्होंने परावुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के दखल के बाद अगस्त 2025 में उन्हें अपनी मोटरसाइकिल वापस मिल सकी, लेकिन मैकेनिक ने उन्हें मरम्मत का कोई बिल या रसीद नहीं दी।
झूठा आश्वासन और दोबारा इंजन फेल होना
मोटरसाइकिल सौंपते समय मैकेनिक ने रंजीत को भरोसा दिलाया था कि मरम्मत किया गया इंजन बिना किसी खराबी के एक लाख किलोमीटर तक चलेगा। उसने रंजीत को हिदायत दी थी कि वह दो हफ्ते बाद इंजन ऑयल बदल लें और शुरुआती तीन हफ्तों तक बाइक की रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटे से कम रखें। इसके बावजूद, तीन महीने के भीतर और केवल 6,000 किलोमीटर चलने से पहले ही इंजन में दोबारा बड़ी खराबी आ गई।
जब किसी दूसरे स्वतंत्र मैकेनिक से बाइक की जांच कराई गई, तो पता चला कि इंजन का क्रैंक पूरी तरह खराब हो चुका है। रंजीत ने जब अनिलकुमार से मरम्मत के पैसे वापस मांगे या किसी अधिकृत सर्विस सेंटर पर मरम्मत कराने का खर्च उठाने को कहा, तो मैकेनिक ने साफ मना कर दिया और उन्हें कहीं और गाड़ी ठीक कराने की सलाह दी। मैकेनिक के काम पर से पूरी तरह भरोसा उठ जाने के बाद, रंजीत ने एक अन्य वर्कशॉप में 17,610 रुपये खर्च कर असली पार्ट्स लगवाए और इंजन को ठीक कराया। इसके बाद उन्होंने कुल 36,752 रुपये के वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए उपभोक्ता आयोग का रुख किया।
आयोग का फैसला और मुआवजा
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष एस. के. श्रीला और सदस्य स्टेनली हेरोल्ड की सदस्यता वाले पैनल ने इस शिकायत पर सुनवाई की। मैकेनिक अनिलकुमार ने निर्धारित समय सीमा के भीतर आयोग के समक्ष अपना पक्ष या स्पष्टीकरण दाखिल नहीं किया था, जिसके बाद आयोग ने उनके जवाब के बिना ही मामले की कार्यवाही आगे बढ़ाई। हाईकोर्ट ने भी इस बात का संज्ञान लिया कि मैकेनिक तय समय के भीतर अपना पक्ष रखने में विफल रहा।
आयोग ने अपने 7 जुलाई के आदेश में कहा कि मैकेनिक द्वारा की गई मरम्मत का काम बेहद गैर-जिम्मेदाराना था और यह एक पेशेवर मैकेनिक के तय मानकों से काफी नीचे दर्जे का था। रंजीत को हुई मानसिक प्रताड़ना और वित्तीय नुकसान को सही मानते हुए आयोग ने मैकेनिक को कुल 66,752 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।
इस कुल राशि में से मैकेनिक को 36,752 रुपये रंजीत को हुए सीधे वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए देने होंगे। इसके अलावा, मानसिक असुविधा, प्रताड़ना और परेशानी के मुआवजे के रूप में 20,000 रुपये और कानूनी कार्यवाही के खर्च के तौर पर 10,000 रुपये का भुगतान करना होगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि मैकेनिक का यह आचरण उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।

