सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से जुड़ी 54 चुनाव याचिकाओं के जल्द निपटारे के लिए मद्रास हाईकोर्ट को निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसा कोई भी निर्देश देना एक गलत मिसाल कायम करेगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी मांगों के साथ सीधे मद्रास हाईकोर्ट जाने की पूरी छूट दी है।
सुनवाई और याचिकाकर्ता की दलीलें
यह जनहित याचिका के वेंकटचलपति द्वारा वकील समीर मलिक के माध्यम से दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील डी एस नायडू ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि वह मद्रास हाईकोर्ट को इन चुनाव याचिकाओं के समयबद्ध निपटारे के लिए एक विशेष पीठ गठित करने का निर्देश दे।
चुनाव परिणाम और विवाद का दायरा
मद्रास हाईकोर्ट में लंबित ये 54 याचिकाएं तमिलनाडु की विभिन्न विधानसभा सीटों के चुनावी नतीजों की वैधता को चुनौती देती हैं। राज्य की 17वीं विधानसभा के लिए इस साल 23 अप्रैल को मतदान हुआ था, जिसमें अभिनेता सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली पार्टी टीवीके ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 4 मई को चुनावी नतीजे घोषित किए गए, जिसके बाद अलग-अलग पक्षों ने 3 जून से 18 जून के बीच हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं।
कानूनी प्रावधान और छह महीने की समय-सीमा
याचिकाकर्ता वेंकटचलपति ने दलील दी कि चुनाव विवादों के निपटारे में होने वाली लंबी देरी जनप्रतिनिधित्व कानून (RPA), 1951 के मूल उद्देश्य को खत्म कर देती है। याचिका में कानून की धारा 86(7) का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया है कि चुनावी याचिकाओं पर सुनवाई जितनी जल्दी हो सके की जानी चाहिए और हाईकोर्ट के सामने याचिका पेश होने के छह महीने के भीतर इसे पूरा करने का प्रयास होना चाहिए। याचिका में आगे कहा गया कि लोकतंत्र की मजबूती, चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए इन मामलों का समय पर निपटारा होना बेहद जरूरी है।

