फरीदाबाद ट्यूशन टीचर की सास की हत्या: आरोपी किशोर पर वयस्क की तरह चलेगा मुकदमा, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बरकरार रखा फैसला

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने फरीदाबाद में अपनी ट्यूशन टीचर की सास की हत्या के आरोपी 16 वर्षीय किशोर पर वयस्क अपराधी की तरह मुकदमा चलाने के आदेश को बरकरार रखा है। जस्टिस जसजीत सिंह बेदी ने आरोपी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि किशोर इतना समझदार है कि उसने बड़ी चतुराई से हत्या का आरोप अपनी ही ट्यूशन टीचर पर मढ़ने की कोशिश की। अदालत ने 6 जुलाई को दिए अपने फैसले में पाया कि आरोपी की मानसिक स्थिति और सामाजिक जांच रिपोर्ट से साफ है कि वह अपने कृत्य के परिणामों को समझने में पूरी तरह सक्षम था।

आरोपी की मानसिक परिपक्वता पर हाईकोर्ट की टिप्पणी

जस्टिस बेदी ने उल्लेख किया कि आरोपी ने खुद को बचाने के लिए यह दावा किया कि शिक्षिका के अपनी सास के साथ संबंध अच्छे नहीं थे और उसने एक बार उन्हें थप्पड़ भी मारा था। अदालत ने कहा कि इस तरह दोष मढ़ने का प्रयास आरोपी की मानसिक परिपक्वता को दर्शाता है। कोर्ट ने मनोचिकित्सक और सामाजिक जांच रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी कुशाग्र बुद्धि का है, उसका कोई मानसिक बीमारी का इतिहास नहीं है और वह कानूनी रूप से अपने किए के परिणाम को समझने के लिए पूरी तरह परिपक्व है।

ट्यूशन न जाने की जिद और वारदात की पृष्ठभूमि

यह मामला पिछले साल 5 अगस्त 2025 का है, जब फरीदाबाद में इस घटना को लेकर एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, आरोपी किशोर अपनी ट्यूशन टीचर के घर पर ही पढ़ता था, जो उसी की बिल्डिंग में रहती थी। घटना के दिन वह दोपहर करीब 12 से 12:30 बजे के बीच होने वाली क्लास के लिए तय समय से कुछ मिनट पहले ही पहुंच गया, लेकिन उसके पास नोटबुक नहीं थी।

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शिक्षिका ने उसे कॉपी लाने के लिए वापस भेजा और खुद बाथरूम चली गईं। इसी दौरान उन्हें अपनी सास की चीख सुनाई दी। बाहर आने पर उन्होंने देखा कि उनकी सास खून से लथपथ बिस्तर पर पड़ी थीं और आरोपी छात्र कमरे में ही खड़ा था। बाद में इलाज के दौरान बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। आरोपी के पिता ने पुलिस को बताया था कि उनका बेटा ट्यूशन नहीं जाना चाहता था और उसने शिक्षिका को डराने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया।

जेजेबी का फैसला और कानूनी प्रक्रिया

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वारदात के समय आरोपी की उम्र 16 साल 4 महीने थी। शुरुआत में उसे जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) के सामने पेश किया गया था। 5 जनवरी को बोर्ड ने आरोपी के साफ रिकॉर्ड, पढ़ाई में अच्छे प्रदर्शन और उम्र का हवाला देते हुए उस पर किशोर (नाबालिग) के रूप में मुकदमा चलाने का निर्देश दिया था।

हालांकि, पीड़िता (शिक्षिका) ने इस फैसले को ट्रायल कोर्ट में चुनौती दी। ट्रायल कोर्ट ने 12 मार्च को जेजेबी के फैसले को पलटते हुए आदेश दिया कि आरोपी के पास इस अपराध को अंजाम देने और इसके परिणामों को समझने की पूरी शारीरिक और मानसिक क्षमता थी, इसलिए उस पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाया जाना चाहिए। किशोर ने इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने भी खारिज कर दिया है।

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