राजस्थान हाईकोर्ट ने शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी और पांच अन्य लोगों के खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही पर मंगलवार को अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मामले की अगली सुनवाई होने तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आगे कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
यह राहत न्यायमूर्ति संजीव पुरोहित की एकल पीठ ने विधायक भाटी की याचिका पर सुनवाई के बाद दी। अदालत में भाटी का पक्ष अधिवक्ता योगेंद्र सिंह चरण ने रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया यह पूरा मामला राजनीतिक हितों और दुर्भावना से प्रेरित दिखाई देता है।
आपराधिक धमकी और अपमान की धाराएं
यह पूरा मामला एक लोक गायक की शिकायत पर दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। पुलिस ने विधायक रवींद्र सिंह भाटी और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351 (आपराधिक धमकी) और धारा 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से कहे गए शब्द या कृत्य) के तहत मामला दर्ज किया था।
सोशल मीडिया विवाद से शुरू हुआ मामला
यह कानूनी विवाद सोशल मीडिया पर विधायक भाटी और लोक गायक छोटू सिंह रावणा के बीच हुई तीखी बहस के बाद शुरू हुआ था। इस संबंध में 1 अप्रैल को शिव थाने में एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिसमें छोटू सिंह रावणा ने आरोप लगाया था कि विधायक ने उन्हें फोन पर धमकाया और उनके परिवार की महिला सदस्यों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब रावणा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट पर टिप्पणी की थी। इस पोस्ट में दावा किया गया था कि विधायक भाटी ने कैंसर से पीड़ित एक बच्चे की मदद की गुहार पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। रावणा का आरोप है कि इस टिप्पणी के सामने आने के बाद विधायक भाटी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन कर धमकी दी थी। इस घटना के बाद रावणा समाज के लोगों में आक्रोश फैल गया था और उन्होंने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर विधायक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

