मुंबई में खुले मैनहोल के कारण होने वाली मौतों पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर प्रशासन किसी हादसे या मौत का इंतजार क्यों करता है? जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच ने बीएमसी की ओर से पेश की गई प्रगति रिपोर्ट और हलफनामे को पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने इसे पूरी तरह बेकार और महज एक आईवॉश (दिखावा) करार दिया।
यह मामला उपनगरीय इलाके साकीनाका में बीते 2 जुलाई को भारी बारिश के दौरान हुई एक दुखद घटना से जुड़ा है। यहां 55 वर्षीय असलम शेख की एक खुले मैनहोल में गिरने से डूबकर मौत हो गई थी।
मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने साफ किया कि नागरिकों की जान बेहद कीमती है और अधिकारियों की लापरवाही की वजह से किसी को अपनी जान नहीं गंवानी चाहिए। जजों ने सवाल किया कि जब हर साल मानसून आना तय है, तो बारिश शुरू होने से पहले ही बीएमसी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं करती? क्या प्रशासन हर बार किसी हादसे के होने और किसी की जान जाने का इंतजार करता है?
लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई और मुआवजे का ऐलान
बीएमसी ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया कि इस हादसे के बाद प्रशासन ने तुरंत कदम उठाए हैं। नगर निगम आयुक्त ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई और उस क्षेत्र के जिम्मेदार चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अलावा, हादसे की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित की गई है। यह समिति पूरी घटना की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए जरूरी उपायों का सुझाव देगी। नगर निगम ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा भी की है।
वकील का आश्वासन: 12 घंटे में बंद होंगे सभी खुले मैनहोल
सुनवाई के दौरान बीएमसी के वकील अनिल साखरे ने बेंच को आश्वस्त किया कि नगर निगम आयुक्त ने शहर में दोबारा ऐसा कोई हादसा न होने देने की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि शहर में जितने भी खुले मैनहोल हैं, उन्हें अगले 12 घंटों के भीतर ढक दिया जाएगा। इसके साथ ही, जिन जगहों पर मरम्मत का काम चल रहा होगा, वहां सुरक्षा के लिहाज से अनिवार्य रूप से बैरिकेड्स लगाए जाएंगे।
हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की है।

